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शिक्षा व्यवस्था में 'भारतीयता' की वापसी: पाठ्यक्रम से हटाई जाएंगी विदेशी संस्कार वाली कविताएं

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की शिक्षा प्रणाली में एक बड़े वैचारिक और सांस्कृतिक बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने घोषणा की है कि बचपन से पढ़ाई जाने वाली प्रसिद्ध अंग्रेजी कविताओं, जैसे 'जॉनी-जॉनी यस पापा' और 'रेन-रेन गो अवे' को अब स्कूल के पाठ्यक्रमों से बाहर करने की कवायद की जाएगी।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय उत्तर प्रदेश (Higher Education Minister Yogendra Upadhyay UP

​मंत्री का मानना है कि ये कविताएं बच्चों के मानस पटल पर गलत प्रभाव डाल रही हैं और भारतीय मूल्यों व संस्कारों के विपरीत हैं।

विदेशी कविताओं पर आपत्ति और तर्क

​उच्च शिक्षा मंत्री के अनुसार, सदियों से चली आ रही ये अंग्रेजी कविताएं भारतीय संस्कृति और परिवेश से मेल नहीं खातीं। उन्होंने इसके पीछे मुख्य रूप से दो तर्क दिए हैं:

  • नैतिकता का अभाव: 'जॉनी-जॉनी यस पापा' जैसी कविताओं में बच्चा चोरी-छिपे चीनी खाता है और पूछने पर झूठ बोलता है। मंत्री का तर्क है कि ऐसी सामग्री बच्चों में बचपन से ही झूठ बोलने की प्रवृत्ति विकसित कर सकती है।
  • प्रकृति विरोधी दृष्टिकोण: 'रेन-रेन गो अवे' (बारिश तुम चली जाओ) जैसी कविताएं प्रकृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण पैदा करती हैं। भारत एक कृषि प्रधान देश है जहाँ वर्षा का स्वागत किया जाता है, ऐसे में बारिश को भगाने की सीख देना भारतीय सोच के खिलाफ है।

​इन बदलावों को अमलीजामा पहनाने के लिए योगेंद्र उपाध्याय जल्द ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर विस्तृत चर्चा करेंगे। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और इस मुद्दे पर विपक्ष के किसी भी विरोध से डरने वाले नहीं हैं।

नामांकन बढ़ाने के लिए शिक्षकों को नई जिम्मेदारी

​शिक्षा के स्तर को सुधारने और डिग्री कॉलेजों में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए भी मंत्री ने एक नई योजना साझा की है। अब उच्च शिक्षा के शिक्षक केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं रहेंगे।

  • ग्राउंड लेवल पर काउंसलिंग: सभी सरकारी और सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेजों के प्राचार्य और शिक्षक अब अपने पास के इंटर कॉलेजों (12वीं कक्षा) में जाएंगे।
  • दाखिले के लिए प्रोत्साहन: शिक्षक वहां जाकर छात्रों को उच्च शिक्षा के फायदों, करियर विकल्पों और अपने संस्थान की सुविधाओं के बारे में जानकारी देंगे ताकि छात्र स्नातक स्तर पर दाखिला लेने के लिए प्रेरित हों।

एक वैचारिक बदलाव की ओर

​इस पहल को शिक्षा के 'भारतीयकरण' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च शिक्षा तक एक ऐसा वातावरण तैयार करना है, जो आधुनिक होने के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी मजबूती से जुड़ा हो।

"हम चाहते हैं कि हमारे बच्चे ऐसी शिक्षा प्राप्त करें जो उन्हें केवल साक्षर न बनाए, बल्कि उनमें अच्छे संस्कार और अपनी संस्कृति के प्रति गर्व का भाव भी पैदा करे।"योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा मंत्री