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PM मोदी का 24 घण्टे में राष्ट्र के नाम दूसरा सम्बोधन, ऑनलाइन क्लास और वर्क फ्रॉम होम को दें प्राथमिकता

Sir Ji Ki Pathshala

पश्चिम एशिया संकट: पीएम मोदी का 'राष्ट्र के नाम आह्वान' – संयम, स्वदेशी और बचत ही बनेगा समाधान

PM Modi speech in Vadodara on West Asia Crisis

वडोदरा। पश्चिम एशिया में गहराते युद्ध के बादलों और वैश्विक अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से एकजुट होकर इस आर्थिक चुनौती का सामना करने की अपील की है। सोमवार को वडोदरा में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि वर्तमान वैश्विक स्थिति इस दशक के सबसे गंभीर संकटों में से एक है। उन्होंने नागरिकों से अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने और संसाधनों के बचत की दिशा में कदम उठाने का आग्रह किया।

संकट से निपटने के लिए पीएम मोदी के 5 मुख्य मंत्र

​प्रधानमंत्री ने इस स्थिति को एक 'आर्थिक युद्ध' की तरह देखते हुए निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं:

  1. ऑनलाइन और वर्क फ्रॉम होम: स्कूलों को ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने और कंपनियों को जहां संभव हो 'वर्क फ्रॉम होम' (WFH) को प्राथमिकता देने के लिए कहा गया है।
  2. ईंधन और ऊर्जा की बचत: तेल की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला में बाधा को देखते हुए नागरिकों से ईंधन की खपत कम करने, सार्वजनिक परिवहन और ई-वाहनों का उपयोग करने की अपील की गई है।
  3. सोने और आयातित वस्तुओं से दूरी: विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम करने के लिए पीएम ने सोने की खरीद को कुछ समय के लिए टालने और आयातित सामान के बजाय 'स्वदेशी' उत्पादों को अपनाने पर जोर दिया।
  4. मितव्ययिता: उन्होंने खाने के तेल के सीमित उपयोग और अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचने का सुझाव दिया है।
  5. सामूहिक प्रयास: मोदी ने विश्वास जताया कि जिस तरह भारत ने अपनी एकजुटता से कोरोना महामारी को मात दी थी, उसी तरह हम इस वैश्विक संकट से भी सुरक्षित बाहर निकल आएंगे।

अर्थव्यवस्था पर दोहरी मार: रुपया और कच्चा तेल

​प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब भारतीय अर्थव्यवस्था पर बाहरी दबाव साफ दिखाई दे रहा है। 24 घंटे के भीतर पीएम द्वारा की गई यह दूसरी बड़ी अपील बाजार की गंभीरता को दर्शाती है।

  • ऐतिहासिक गिरावट: सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 79 पैसे की भारी गिरावट के साथ 95.28 के अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
  • वैश्विक तनाव: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और शांति प्रस्तावों के विफल होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा और मुद्रास्फीति पर पड़ रहा है।
​"जब भी देश के सामने युद्ध या कोई बड़ा संकट आया है, नागरिकों ने हमेशा जिम्मेदारी निभाई है। आज फिर समय आ गया है कि हम अपनी छोटी-छोटी कोशिशों से देश की आर्थिक शक्ति को बनाए रखें।"— नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

​प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि 'बूंद-बूंद से घड़ा भरता है', इसलिए हर नागरिक का एक छोटा सा त्याग भी देश को इस वैश्विक अस्थिरता से बाहर निकालने में बड़ी भूमिका निभाएगा।