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परिषदीय शिक्षकों की वरिष्ठता का आधार: मौलिक नियुक्ति तिथि ही क्यों है अनिवार्य?

Sir Ji Ki Pathshala

परिषदीय शिक्षक वरिष्ठता सूची (Basic Teacher Seniority List)

Teacher Seniority Rules UP

​उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की ज्येष्ठता (Seniority) का निर्धारण हमेशा से एक जटिल और चर्चा का विषय रहा है। प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम और विभिन्न विधिक साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद यह स्पष्ट है कि एक पारदर्शी और न्यायसंगत वरिष्ठता सूची के लिए मौलिक नियुक्ति तिथि को ही मुख्य आधार बनाया जाना चाहिए।

​नीचे इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई है:

​1. संवर्गों की बदलती स्थिति: 4 से हुए 3 संवर्ग

​पूर्व में परिषदीय शिक्षकों के लिए 4 अलग-अलग संवर्ग निर्धारित थे, लेकिन माननीय न्यायालय के विभिन्न फैसलों के उपरांत अब मुख्य रूप से 3 संवर्ग ही अस्तित्व में हैं:

  • सहायक अध्यापक (प्राथमिक विद्यालय)
  • प्रधानाध्यापक (प्राथमिक विद्यालय) / सहायक अध्यापक (उच्च प्राथमिक विद्यालय)
  • प्रधानाध्यापक (उच्च प्राथमिक विद्यालय)

​वर्तमान परिप्रेक्ष्य में अधिकांश नियुक्तियां 'सहायक अध्यापक (प्राथमिक)' के पद पर ही हुई हैं, जिससे वरिष्ठता निर्धारण के नियमों की स्पष्टता और अधिक आवश्यक हो जाती है।

​2. ज्येष्ठता निर्धारण के निर्धारित मानक

​नियमावली के नियम 22, 17 और 18 के आलोक में ज्येष्ठता तय करने का एक निश्चित क्रम है, जिसका पालन न करना विधिक अड़चनों को जन्म देता है:

  1. प्रथम नियुक्ति (मौलिक नियुक्ति) तिथि: सेवा में आने की सबसे पहली तारीख।
  2. चयन सूची में मेरिट गुणांक: यदि नियुक्ति तिथि समान है, तो चयन समिति द्वारा निर्धारित मेरिट को आधार बनाया जाता है।
  3. जन्म तिथि: मेरिट समान होने पर आयु में बड़े शिक्षक को वरिष्ठ माना जाता है।
  4. एल्फाबेट (Alphabetical Order): उपरोक्त सभी मानक समान होने पर नाम के अक्षरों के क्रम का सहारा लिया जाता है।

​3. उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सीधी भर्ती बनाम पदोन्नति

​वर्ष 2013 की नियमावली के अनुसार, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान और गणित के 29,300 पदों पर सीधी भर्ती का प्रावधान किया गया (50% सीधी भर्ती और 50% पदोन्नति)। यहाँ वरिष्ठता के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु ध्यान देने योग्य हैं:

  • ​सीधी भर्ती से आए शिक्षकों को उन शिक्षकों से नीचे रखा जाता है जो पदोन्नति पाकर पहले से वहां कार्यरत हैं।
  • ​यदि एक ही तिथि पर सीधी भर्ती और पदोन्नति होती है, तो पदोन्नति पाने वाले शिक्षक वरिष्ठ माने जाएंगे।
  • ​उच्च प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक पद के लिए न्यूनतम 3 वर्ष की सेवा अनिवार्य है, चाहे वह सीधी भर्ती से आया हो या पदोन्नति से।

​4. पदोन्नति तिथि बनाम मौलिक नियुक्ति तिथि

​अक्सर यह प्रश्न उठता है कि वरिष्ठता का आधार पदोन्नति तिथि क्यों नहीं हो सकता? इसका उत्तर विधिक सिद्धांतों में निहित है:

  • सुप्रीम कोर्ट का दृष्टिकोण: यदि वरिष्ठता पदोन्नति तिथि से तय की जाती है, तो चयन सूची आधारित मेरिट (Merit-based seniority) समाप्त हो जाएगी। यह उच्चतम न्यायालय के उन निर्णयों की अवहेलना होगी जिनमें कहा गया है कि किसी कर्मचारी को उसकी गलती के बिना वरिष्ठता से वंचित नहीं किया जा सकता।
  • सिंचाई विभाग मामला: कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वरिष्ठों को पीछे न धकेला जाए, बल्कि उन्हें तब तक सुरक्षित रखा जाए जब तक उनके कनिष्ठ उनके समकक्ष न आ जाएं।

​5. पूर्व की त्रुटियाँ और सुधार की आवश्यकता

​पूर्व में कई जनपदों में 'कार्यभार ग्रहण करने की तिथि' (Joining Date) को आधार मानकर सूचियां बनाई गईं, जो कि नियम विरुद्ध था। इससे मेरिट गुणांक और मौलिक नियुक्ति तिथि की अनदेखी हुई। सही ज्येष्ठता सूची तभी संभव है जब वह चयन सूची के मौलिक मानकों पर आधारित हो।

​6. अंतर्जनपदीय स्थानांतरण: एक अपवाद

​अंतर्जनपदीय स्थानांतरण (Inter-district transfer) के मामले में वरिष्ठता के नियम बदल जाते हैं क्योंकि यह जिला संवर्ग की सेवा है:

  • ​दूसरे जिले में जाने पर शिक्षक का पुराना 'लियन' (Lien) समाप्त हो जाता है।
  • ​ऐसे शिक्षकों को नए जनपद के संवर्ग में सबसे नीचे स्थान दिया जाता है।
  • ​यहाँ वरिष्ठता का क्रम ट्रांसफर दिनांक > प्रथम नियुक्ति तिथि > जन्म तिथि के आधार पर होना चाहिए। एक ही दिन कार्यभार ग्रहण करने वालों में पहले ज्वाइन करने वाले को वरिष्ठ मानना नियम 22(2) के विपरीत है।

​निष्कर्ष

​100% सटीक और विवाद रहित वरिष्ठता सूची के लिए मौलिक नियुक्ति तिथि (First Appointment Date) को ही आधार बनाना एकमात्र विकल्प है। 'मौलिक' शब्द स्वयं 'मूल' सेवा की उत्पत्ति को दर्शाता है। यदि विभाग इस आधार पर सूची तैयार करता है, तो शिक्षकों को बिना किसी विधिक बाधा के समयबद्ध पदोन्नति और उनके सेवा अधिकारों का लाभ मिल सकेगा।