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24 घंटे में 100% जनगणना! परबतसर में दो कर्मचारियों को तहसीलदार का नोटिस

Sir Ji Ki Pathshala

डिजिटल युग का 'चमत्कार' या लापरवाही? 24 घंटे में कर दी 100% जनगणना, फंसे दो कर्मचारी

Parbatsar Census Employees Notice by Tehsildar

परबतसर। सरकारी कामों में ढिलाई के किस्से तो आपने बहुत सुने होंगे, लेकिन राजस्थान के परबतसर में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सबको हैरान कर दिया है। यहाँ जनगणना कार्य में लगे दो कर्मचारियों ने महज 24 घंटे के भीतर ही 100% काम पूरा करने का 'रिकॉर्ड' बना डाला। हालांकि, यह अति-उत्साह अब उनके लिए गले की फांस बन गया है। तहसीलदार ने इसे गंभीर लापरवाही और संदिग्ध मानते हुए दोनों को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है।

​क्या है पूरा मामला?

​सरकार की ओर से जनगणना जैसे बेहद महत्वपूर्ण और बारीक काम को शुद्धता से पूरा करने के लिए एक महीने (30 दिन) का समय निर्धारित किया गया है। लेकिन परबतसर में तैनात सुपरवाइजर कमल किशोर और प्रगणक (इन्यूमरेटर) अशोक कुमार ने डिजिटल जनगणना ऐप पर महज 24 घंटे के भीतर ही अपने क्षेत्र का 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण होने की रिपोर्ट सबमिट कर दी।

​ऐसे खुला फर्जीवाड़े का शक

​जब उच्च अधिकारियों के पास सिर्फ एक दिन में पूरे क्षेत्र की जनगणना पूरी होने का डेटा पहुंचा, तो प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई।

  • ​इतने कम समय में घर-घर जाकर सटीक आंकड़े जुटाना व्यावहारिक रूप से असंभव है।
  • ​इस 'चमत्कारी' स्पीड को देखकर तहसीलदार को गहरी गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का संदेह हुआ।
  • ​मामले की प्रारंभिक जांच कराई गई, तो कागजों और ऐप पर दर्ज आंकड़ों में भारी अनियमितताएं (खामियां) पाई गईं।

​तहसीलदार की सख्त कार्रवाई: 3 दिन का अल्टीमेटम

​मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार हरेंद्र सिंह ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सुपरवाइजर कमल किशोर और प्रगणक अशोक कुमार को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर दिया है।

प्रशासन का रुख: "जनगणना राष्ट्र के नीति-निर्धारण के लिए एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण कार्य है। इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, जल्दबाजी या फर्जी डेटा फीडिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोनों कर्मियों को 3 दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है। संतोषजनक जवाब न मिलने पर अनुशासनात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"


​आगे क्या?

​तहसील प्रशासन ने साफ किया है कि यह जांच सिर्फ नोटिस तक सीमित नहीं रहेगी। ऐप पर फीड किए गए डेटा का ग्राउंड वेरिफिकेशन (धरातल पर जाकर जांच) भी किया जा सकता है ताकि यह पता चल सके कि कर्मचारियों ने घर बैठे ही फर्जी आंकड़े तो नहीं भर दिए। इस कार्रवाई के बाद से ब्लॉक के अन्य ब्लॉक और जनगणना कर्मियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।

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