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शिक्षकों के समायोजन (Samayojan 3.1) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, सीनियर-जूनियर का विवाद खत्म

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने शिक्षकों के समायोजन (3.1) प्रक्रिया को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। करीब एक घंटे चली लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाबों की समीक्षा की और असमंजस की स्थिति में पड़े प्रदेश भर के शिक्षकों की चिंताओं को दूर कर दिया है। कोर्ट के इस फैसले से सीनियर और जूनियर शिक्षकों के बीच चल रहा गतिरोध अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।

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​सीनियर शिक्षक ही माने जाएंगे सरप्लस (Surplus)

​इस सुनवाई का सबसे बड़ा बिंदु यह रहा कि विद्यालय में छात्र-शिक्षक अनुपात से अधिक होने पर किसे हटाया जाएगा। सरकार ने पूर्व में आए 'पुष्कर सिंह चंदेल' मामले के आदेश का हवाला दिया, जिसे डिवीजन बेंच ने स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि समायोजन की प्रक्रिया में सीनियर-मोस्ट (वरिष्ठतम) शिक्षक को ही सरप्लस माना जाएगा और उन्हें ही पहले समायोजित किया जाएगा। इस फैसले से जूनियर शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है।

​'सब्जेक्ट मैपिंग' (Subject Mapping) का पालन अनिवार्य

​जूनियर विद्यालयों के समायोजन पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए सब्जेक्ट मैपिंग को अनिवार्य घोषित किया है।

  • नियम: कोर्ट के अनुसार, प्रत्येक विद्यालय में सभी अनिवार्य विषयों (जैसे- गणित, विज्ञान, भाषा आदि) के शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होनी चाहिए।
  • शर्त: किसी स्कूल में यदि कोई शिक्षक सबसे सीनियर है, लेकिन वह उस विषय का इकलौता शिक्षक है, तो उसे स्कूल से नहीं हटाया जा सकता। सरप्लस का निर्धारण केवल उन्हीं विषयों में किया जाएगा जहाँ स्वीकृत पदों से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं।
महत्वपूर्ण निर्देश: पहले स्कूलों में विषयवार शिक्षकों की मैपिंग देखी जाएगी, उसके बाद ही सरप्लस शिक्षकों की अंतिम सूची तैयार होगी।

​लखनऊ बेंच के 'स्टे' (Stay) मामलों पर कोर्ट का आदेश

​लखनऊ खंडपीठ में चल रहे समायोजन के मामलों पर भी कोर्ट ने बड़ा निर्देश दिया है। जिन शिक्षकों ने पहले चरण के समायोजन में 'अंतिम राहत' (Interim Relief) या स्टे प्राप्त किया हुआ था, कोर्ट ने उन्हें अब और राहत देने से इनकार कर दिया है। उच्च न्यायालय ने सरकार को तुरंत लखनऊ बेंच में 'स्टे वेकेशन' (Stay Vacation) एप्लीकेशन लगाने को कहा है, ताकि उन सभी शिक्षकों को भी सरप्लस मानते हुए वर्तमान समायोजन सूची में शामिल किया जा सके। कोर्ट का उद्देश्य पूरे प्रदेश में एक समान और पारदर्शी नीति लागू करना है।

​3 जुलाई को होगी अगली सुनवाई, फिलहाल प्रक्रिया पर रोक

​हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस नई गाइडलाइन (सीनियरिटी और सब्जेक्ट मैपिंग) के आधार पर पूरे प्रदेश के लिए एक नई यूनिफॉर्म रिपोर्ट और सूची तैयार करे।

​जब तक यह नई सूची तैयार होकर कोर्ट के समक्ष समीक्षा के लिए प्रस्तुत नहीं की जाती, तब तक किसी भी समायोजन को अंतिम रूप से पूरा नहीं किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई 3 जुलाई को तय की गई है, जिसके बाद ही अंतिम प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।

शिक्षक समायोजन (Teacher Adjustment 3.1) प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट्स दिए गए हैं। मुख्य बातें संक्षेप में निम्नलिखित हैं:

​1. FIFO (First In First Out) का नियम

  • ​अब सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों की सूची FIFO (पहले आए, पहले जाए) के सिद्धांत पर तैयार की जाएगी।

​2. डेटा सत्यापन और कार्रवाई

  • जिलाधिकारी (DM) अपने स्तर पर पूरे डेटा की जांच करेंगे, विसंगतियों (गलतियों) को दूर करेंगे और अंतिम डेटा सत्यापित करेंगे।
  • ​डेटा में विसंगतियों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

​3. कोर्ट केस और स्टे (Stay) के मामले

  • ​जिन मामलों में सिंगल बेंच का स्टे है, वहां सरकार स्टे वैकेशन एप्लीकेशन (Stay Vacation Application) दाखिल करेगी।
  • ​जिन शिक्षकों के मामलों में स्टे है, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा, लेकिन उनके विकल्प भी सूची में रखे जाएंगे।
  • ​माननीय न्यायालय ने सरकार से अटैच्ड (संबद्ध) शिक्षकों का विवरण भी मांगा है।
  • ​अपीलाार्थियों के संबंध में अगली तारीख तक यथास्थिति (Status Quo) बनी रहेगी।

​4. समय-सीमा (Timeline) और रोक

  • ​पूरी समायोजन प्रक्रिया जून के अंत तक पूरी कर ली जाएगी।
  • 03.07.2026 को जिलावार अंतिम सूची न्यायालय (कोर्ट) में पेश की जाएगी।
  • ​तब तक किसी भी प्रकार के समायोजन या ट्रांसफर पर पूरी तरह रोक रहेगी। न्यायालय की अनुमति के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी।