महोबा, उत्तर प्रदेश। जनपद महोबा में तैनात एक महिला प्रधानाध्यापिका ने जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) पर यौन उत्पीड़न, अश्लील व्यवहार और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित महिला कोई साधारण शिक्षिका नहीं हैं, बल्कि उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए मुख्यमंत्री द्वारा 'राज्य अध्यापक पुरस्कार' से सम्मानित किया जा चुका है।
शिकायती पत्र के माध्यम से सामने आए तथ्यों के अनुसार, विवाद की जड़ें फरवरी 2025 में शुरू हुईं। महिला प्रधानाध्यापिका अपने विद्यालय की बाउंड्री वॉल से जुड़ी समस्याओं के समाधान हेतु BSA कार्यालय गई थीं। आरोप है कि वहां BSA आरोपित ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया और उन्हें शाम के समय अपने निजी आवास पर आने के लिए मजबूर किया। शिक्षिका का कहना है कि जब उन्होंने अधिकारी की इस अनैतिक मंशा को भांपते हुए आवास पर जाने से मना कर दिया, तो उनके विरुद्ध साजिशों का एक अंतहीन सिलसिला शुरू हो गया।
मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि विभाग के ही कुछ अन्य कर्मचारी और शिक्षक इस उत्पीड़न में सहभागी बने। पत्र में दावा किया गया है कि सहायक अध्यापक पुरुषोत्तम और सहायक अध्यापिका नम्रता कौशिक ने पीड़िता पर दबाव बनाया कि वह अधिकारी की 'शर्तें' मान लें। इन सहयोगियों ने कथित तौर पर अनैतिक भाषा का प्रयोग करते हुए पीड़िता को प्रलोभन देने की कोशिश की, ताकि वह अधिकारी को खुश कर सकें। जब प्रधानाध्यापिका ने इस संगठित दबाव के आगे झुकने से इनकार कर दिया, तो विभाग की ओर से उन पर झूठी जांचों का बोझ डाल दिया गया और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा।
प्रताड़ना का यह दौर यहीं नहीं थमा। पीड़िता ने बताया कि जब वह अपने 73 वर्षीय वृद्ध पिता के साथ न्याय की मांग करने कार्यालय पहुंचीं, तो वहां भी उन्हें भारी अपमान सहना पड़ा। आरोप है कि BSA ने उनके बुजुर्ग पिता को धक्के देकर कार्यालय से बाहर कर दिया और शिक्षिका के साथ अश्लील हरकतें करने का प्रयास किया। अधिकारी ने कथित तौर पर प्रमोशन का लालच देकर एक रात साथ बिताने की घिनौनी मांग रखी।
अंततः, जब पीड़िता ने किसी भी कीमत पर अपनी गरिमा से समझौता नहीं किया, तो 28 जनवरी 2026 को बिना किसी ठोस साक्ष्य या न्यायसंगत प्रक्रिया के उन्हें निलंबित कर दिया गया। 17 वर्षों के बेदाग करियर और राज्य स्तर पर सम्मानित होने के बावजूद, एक महिला शिक्षिका को इस तरह की कार्रवाई का सामना करना पड़ा। अब पीड़ित शिक्षिका ने पुलिस प्रशासन से मांग की है कि BSA और उनके सहयोगियों के विरुद्ध तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें बहाल कर न्याय प्रदान किया जाए। यह मामला अब पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है और प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहा है।
यह मामला न केवल एक महिला के सम्मान से जुड़ा है, बल्कि इस ओर भी इशारा करता है कि कैसे रसूखदार पदों पर बैठे लोग अधिकारों का दुरुपयोग कर महिलाओं का शोषण करने का प्रयास करते हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या कदम उठाता है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सोशल मीडिया/प्राप्त पत्रों के आधार पर तैयार किया गया है। लगाए गए आरोपों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही संभव है। निजता नीति के तहत नाम नहीं लिखा गया है।


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