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शिक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, जिले के सभी 840 प्रधानाध्यापकों का वेतन रोका

Sir Ji Ki Pathshala

महोबा। उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में बेसिक शिक्षा विभाग ने अनुशासन और डिजिटल व्यवस्था को लागू करने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में लगातार बरती जा रही लापरवाही को देखते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी प्राथमिक, कंपोजिट और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों का वेतन अग्रिम आदेश तक रोक दिया है। इस सामूहिक दंडात्मक कार्रवाई से पूरे जिले के शिक्षा जगत में खलबली मच गई है।

Mahoba BSA Rahul Mishra Action

प्रेरणा ऐप की अनदेखी पड़ी भारी

​शासन के निर्देशों के अनुसार, परिषदीय विद्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों की उपस्थिति की वास्तविक स्थिति जानने के लिए 'प्रेरणा ऐप' के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी लगाना अनिवार्य किया गया है। विभाग का उद्देश्य है कि स्कूलों में नामांकन के सापेक्ष छात्रों की उपस्थिति का डेटा प्रतिदिन अपडेट हो, ताकि शैक्षिक योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके। हालांकि, जिले के चारों विकास खंडों में संचालित 840 विद्यालयों में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा था। कई स्तरों पर चेतावनी दिए जाने के बावजूद प्रधानाध्यापकों द्वारा तकनीकी प्रक्रिया में रुचि नहीं ली गई, जिसे विभाग ने घोर लापरवाही और शासन के आदेशों की अवमानना माना है।

बीएसए राहुल मिश्रा का कड़ा रुख

​जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल मिश्रा ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल कार्यप्रणाली को अपनाना अब विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्यता है। समीक्षा के दौरान यह पाया गया कि अधिकांश प्रधानाध्यापक छात्रों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में उदासीनता बरत रहे हैं। इस शिथिलता के कारण जिले की रैंकिंग और विभाग की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। इसी को आधार बनाते हुए बीएसए ने जिले के सभी 840 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के वेतन को तत्काल प्रभाव से रोकने का आदेश जारी कर दिया।

शिक्षक समुदाय में हड़कंप और भविष्य की राह

​एक साथ इतनी बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों का वेतन रोके जाने से शिक्षकों के बीच हड़कंप की स्थिति है। यह संभवतः जिले में शिक्षा विभाग की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। बीएसए कार्यालय ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यह रोक तब तक जारी रहेगी जब तक विद्यालय स्तर पर ऑनलाइन उपस्थिति का कार्य शत-प्रतिशत और नियमित रूप से शुरू नहीं हो जाता। विभाग का यह कड़ा रुख स्पष्ट करता है कि अब डिजिटल हाजिरी के मामले में किसी भी प्रकार की कोताही स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में उन प्रधानाध्यापकों की जांच भी की जा सकती है जो जानबूझकर तकनीक के इस्तेमाल से बच रहे हैं।