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ईरान संकट का साया: विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोना और इलेक्ट्रॉनिक्स आयात पर सख्ती की तैयारी

Sir Ji Ki Pathshala

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के तनाव और ईरान संकट के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को संभावित झटकों से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने कमर कस ली है। सूत्रों के मुताबिक, देश के विदेशी मुद्रा भंडार को सुरक्षित रखने और चालू खाते के घाटे (CAD) को नियंत्रित करने के लिए सरकार सोने और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-जरूरी सामानों के आयात में भारी कटौती करने पर विचार कर रही है।

Gold and Electronic Import India PM Modi

आर्थिक मोर्चे पर आपात बैठकें

​प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और वित्त मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ लगातार संपर्क में हैं। माना जा रहा है कि यदि ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आता है, तो भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है। इसी दबाव को कम करने के लिए 'गैर-जरूरी' श्रेणी की वस्तुओं पर अंकुश लगाने का खाका तैयार किया जा रहा है।

रणनीति के मुख्य बिंदु:

  • सोने पर नियंत्रण: सोने को हमेशा से भारत के आयात बिल में एक बड़े बोझ के रूप में देखा जाता है। इसकी मांग कम करने के लिए आयात शुल्क में बढ़ोतरी या कोटा सिस्टम जैसे उपायों पर मंथन जारी है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स पर लगाम: स्मार्टफोन, टीवी और अन्य लग्जरी इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों के आयात को सीमित कर घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और डॉलर बचाने की योजना है।
  • ईंधन की कीमतों में वृद्धि: बढ़ते अंतरराष्ट्रीय घाटे की भरपाई के लिए ईंधन की कीमतों में आंशिक बढ़ोतरी के संकेत मिल रहे हैं, ताकि खपत को नियंत्रित किया जा सके।

प्रधानमंत्री की अपील: 'संयम बरतें नागरिक'

​पिछले 24 घंटों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दो बार राष्ट्र के नाम अपने संदेश में आर्थिक अनुशासन पर जोर दिया है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि:

  1. ईंधन की खपत कम करें: बेवजह वाहनों का प्रयोग सीमित करें।
  2. विदेशी यात्राओं में कटौती: विदेशी मुद्रा बाहर जाने से रोकने के लिए फिलहाल गैर-जरूरी विदेश दौरों से बचें।
विशेषज्ञों की राय: "बढ़ता चालू खाते का घाटा रुपये की वैल्यू को कम कर सकता है। ऐसे में सोने और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे गैर-उत्पादक आयात पर सख्ती करना एक कड़वा लेकिन जरूरी फैसला साबित हो सकता है।"

​फिलहाल, वित्त मंत्रालय और आरबीआई ने इन प्रस्तावों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि युद्ध की स्थिति और गंभीर होने पर सरकार किसी भी समय इन कड़े फैसलों का ऐलान कर सकती है।