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'बच्चों को छुई-मुई नहीं, प्रचंड तेज से युक्त बनाएं' — सीएम योगी आदित्यनाथ

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजधानी में आयोजित अनुदेशक सम्मान समारोह के दौरान शिक्षा, संस्कारों और देश की भावी पीढ़ी को लेकर एक बड़ा और प्रेरणादायक विज़न साझा किया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देकर 'छुई-मुई' (अति-संवेदनशील) बनाने के बजाय स्वावलंबी, साहसी और कर्मठ बनाना होगा, ताकि वे भविष्य की हर चुनौती का डटकर सामना कर सकें।

अनुदेशक सम्मान समारोह में भाषण देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ।

​श्रमदान और स्वच्छता को लेकर नजरिया बदलने की जरूरत

​समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उन लोगों और मीडिया के कुछ हिस्सों पर कड़ा रुख अपनाया जो स्कूली बच्चों द्वारा किए जाने वाले सामाजिक कार्यों या स्वच्छता अभियान (श्रमदान) को नकारात्मक रूप में पेश करते हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "जब बच्चे कहीं श्रमदान करते हैं, तो दिखाया जाता है कि देखो बच्चों से काम कराया जा रहा है। अरे, इसमें क्या बुरा हो रहा है?"

  • स्वावलंबन का पाठ: सीएम योगी के अनुसार, जब बच्चे अपने हाथों से काम करते हैं, तो उनमें मेहनत के प्रति सम्मान और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना पैदा होती है।
  • संस्कारों का हिस्सा बने स्वच्छता: स्वच्छता और सेवा भाव को जब तक बच्चों के दैनिक जीवन और संस्कारों का हिस्सा नहीं बनाया जाएगा, तब तक वे समाज की जमीनी हकीकतों से रूबरू नहीं हो पाएंगे।

​सराहनीय कार्य करने वाले शिक्षकों को मिले सम्मान, न कि नोटिस

​अनुदेशकों और शिक्षकों की भूमिका की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा परिषद को स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और व्यावहारिक ज्ञान देने का प्रयास कर रहे हैं, सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के आधार पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और न ही स्पष्टीकरण (Explanation) मांगा जाना चाहिए।

"ऐसे शिक्षकों से स्पष्टीकरण मांगने के बजाय उन्हें बुलाकर सम्मानित किया जाना चाहिए, क्योंकि वे भारत की भावी पीढ़ी को चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए तैयार कर रहे हैं।" योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री (उ.प्र.)

​शिक्षा और संस्कारों से विकसित होगा सामर्थ्य

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ज़ोर देकर कहा कि बच्चों में वह 'प्रचंड तेज' होना चाहिए कि कोई उन्हें गलत तरीके से प्रभावित न कर सके। यह तेज केवल किताबों से नहीं, बल्कि सही शिक्षा, उच्च संस्कारों और स्वच्छता के प्रति उनके जीवन का हिस्सा बनकर पैदा होगा।

​जब बच्चे श्रम का मूल्य समझेंगे और उनमें सही-गलत व अच्छे-बुरे का भेद करने का सामर्थ्य विकसित होगा, तभी देश को एक ऐसी मजबूत पीढ़ी मिलेगी जो एक आत्मनिर्भर और सशक्त भारत की नींव रखेगी।

👉 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का यह पूरा बयान देखने के लिए यहाँ क्लिक करें:

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