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बेसिक शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार पर बड़ी गाज: एक बीईओ निलंबित, दूसरे को नोटिस जारी

Sir Ji Ki Pathshala

कन्नौज: उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में बेसिक शिक्षा विभाग के भीतर फैले भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ शासन ने अभियान तेज कर दिया है। विभाग में मची इस खलबली के केंद्र में दो अलग-अलग ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) हैं, जिन पर पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं। अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामता राम पाल की इस कड़ी कार्रवाई से पूरे जिले के प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।

कन्नौज बीईओ निलंबन और भ्रष्टाचार मामला न्यूज़

​तालग्राम विकास खंड के खंड शिक्षा अधिकारी रमेश चन्द्र चौधरी को शासन ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। उन पर 'राजकुमारी मेवाराम आदर्श विद्यालय' नामक एक अवैध स्कूल के संचालकों से साठगांठ करने का दोष पाया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, रमेश चन्द्र चौधरी ने नियमों को ताक पर रखकर न केवल अवैध स्कूल का संचालन होने दिया, बल्कि इसके बदले मोटी वसूली भी की। इस मिलीभगत के कारण लगभग 400 बच्चों का भविष्य दांव पर लग गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें कानपुर मंडल के सहायक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया गया है और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को इस पूरे प्रकरण की जांच सौंपी गई है।

​भ्रष्टाचार का दूसरा मामला सौरिख विकास खंड से सामने आया है, जहाँ खंड शिक्षा अधिकारी विश्वनाथ पाठक पर एक महिला प्रधानाध्यापिका के उत्पीड़न और कमीशनखोरी का आरोप लगा है। पिपरिया प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका कल्पना पाल ने शिकायत दर्ज कराई थी कि विद्यालय के मरम्मत कार्य के लिए जारी 4,62,796 रुपये के बजट में से बीईओ ने 20 प्रतिशत कमीशन की मांग की थी।

​प्रधानाध्यापिका का आरोप है कि कमीशन देने से मना करने पर उन्हें प्रशासनिक रूप से प्रताड़ित किया जाने लगा। उनकी उपस्थिति रजिस्टर में जानबूझकर खामियां निकाली गईं और उनके बाल्य देखभाल अवकाश (CCL) के आवेदन को चार बार निरस्त किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल ने बीईओ विश्वनाथ पाठक को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर बीईओ और संबंधित बीएसए के विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

​एक ही जिले में दो खंड शिक्षा अधिकारियों पर हुई इस बड़ी कार्रवाई ने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपर शिक्षा निदेशक ने साफ संदेश दिया है कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले और सरकारी धन में बंदरबांट करने वाले अधिकारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। शासन की इस सख्ती से अब उन अधिकारियों में डर का माहौल है जो लंबे समय से साठगांठ और अवैध वसूली के खेल में शामिल थे।