लखनऊ: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत अब तेजी से बदल रही है। राज्य के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहाल अब न केवल किताबी ज्ञान हासिल कर रहे हैं, बल्कि तकनीक और नवाचार के मेल से उनकी सीखने की गुणवत्ता में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है। हाल ही में लखनऊ में आयोजित 'फाउंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमेरेसी' (FLN) लीडरशिप कॉन्क्लेव में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने इस बदलाव की एक स्पष्ट तस्वीर पेश की।
निपुण भारत मिशन: साक्षरता और दक्षता का नया अध्याय
शिक्षा मंत्री के अनुसार, प्रदेश में निपुण भारत मिशन के परिणाम अब धरातल पर दिखने लगे हैं। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य कक्षा 1 से 3 तक के बच्चों में आधारभूत साक्षरता और संख्यात्मक दक्षता (FLN) विकसित करना है। सरकार का मानना है कि यदि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चे की शैक्षिक नींव मजबूत होगी, तो आगे चलकर उसकी ड्रॉप-आउट दर में कमी आएगी और सीखने की क्षमता बढ़ेगी।
तकनीक और स्मार्ट क्लास से सुगम हुई शिक्षा
उत्तर प्रदेश के हजारों परिषदीय विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया गया है। राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि आज गांवों के स्कूलों में भी निम्नलिखित सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं:
- स्मार्ट क्लासेस: कठिन विषयों को विजुअल माध्यम से सरल और रोचक बनाया जा रहा है।
- आईसीटी (ICT) लैब: बच्चों को शुरुआती स्तर से ही कंप्यूटर और तकनीकी ज्ञान से जोड़ा जा रहा है।
- डिजिटल लाइब्रेरी: छात्रों की पहुंच अब ई-बुक्स और आधुनिक शैक्षिक सामग्री तक आसान हो गई है।
नवाचार आधारित शिक्षण पद्धति
निपुण भारत मिशन के तहत शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे भाषा और गणित जैसे विषयों को खेल-खेल में और गतिविधियों के माध्यम से पढ़ा सकें। इससे बच्चों में गणितीय गणना (न्यूमेरेसी) और भाषा की समझ (लिटरेसी) को लेकर जो झिझक थी, वह अब दूर हो रही है।
समावेशी और प्रभावी शिक्षा का संकल्प
कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए संदीप सिंह ने जोर देकर कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही एक विकसित समाज की रीढ़ है। सरकार का लक्ष्य केवल साक्षरता बढ़ाना नहीं, बल्कि एक ऐसी समावेशी शिक्षा प्रणाली तैयार करना है, जहाँ हर वर्ग और हर पृष्ठभूमि का बच्चा आधुनिक शिक्षा के समान अवसर प्राप्त कर सके।
उत्तर प्रदेश में 'मिशन कायाकल्प' के बाद अब 'निपुण भारत मिशन' शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित हो रहा है। बुनियादी शिक्षा में तकनीक का प्रवेश और कौशल विकास पर जोर देना निश्चित रूप से प्रदेश के बच्चों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।


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