UP Teachers Cashless Treatment Scheme: ₹5 लाख तक का मुफ्त उपचार
उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के माध्यमिक और बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ देने का निर्णय लिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गंभीर बीमारियों के समय शिक्षकों को वित्तीय संकट से बचाना और उन्हें गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है।
1. किन शिक्षकों को मिलेगा इस योजना का लाभ?
यह सुविधा मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के लिए प्रस्तावित है:
- सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (Aided Schools) के शिक्षक और कर्मचारी।
- बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षक।
- शिक्षा विभाग के वे कर्मचारी जो अब तक किसी अन्य सरकारी कैशलेस स्कीम (जैसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना) के दायरे में नहीं थे।
2. योजना की मुख्य विशेषताएं
- बीमा कवर: प्रति परिवार प्रति वर्ष ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज।
- अस्पताल: प्रदेश के सभी सूचीबद्ध (Empaneled) सरकारी अस्पतालों और निजी कॉर्पोरेट अस्पतालों में इलाज की सुविधा।
- प्रक्रिया: यह पूरी तरह कैशलेस होगी, यानी मरीज को अस्पताल में पैसे देने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
3. आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Important Documents)
योजना का लाभ लेने और अपना हेल्थ कार्ड बनवाने के लिए शिक्षकों को निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होगी:
- आधार कार्ड: पहचान और पते के प्रमाण के लिए।
- विभागीय पहचान पत्र (ID Card): कार्यरत होने के प्रमाण स्वरूप।
- मानव संपदा आईडी (Manav Sampada ID): डेटा वेरिफिकेशन के लिए अनिवार्य।
- पे-स्लिप (Pay Slip): वर्तमान वेतन और पद की पुष्टि के लिए।
- पासपोर्ट साइज फोटो: डिजिटल हेल्थ कार्ड के लिए।
- परिवार के सदस्यों के विवरण: यदि आश्रितों को भी योजना में शामिल किया जा रहा है, तो उनके आधार कार्ड।
4. कैसे मिलेगा लाभ?
- पंजीकरण: पात्र शिक्षकों को विभाग द्वारा निर्धारित पोर्टल पर जाकर अपना और अपने परिवार का ऑनलाइन पंजीकरण करना होगा।
- सत्यापन: विभाग द्वारा डेटा का सत्यापन होने के बाद एक 'स्टेट हेल्थ कार्ड' जारी किया जाएगा।
- उपचार: किसी भी सूचीबद्ध अस्पताल में जाकर यह कार्ड दिखाकर ₹5 लाख तक का कैशलेस इलाज प्राप्त किया जा सकेगा।
नोट: इस योजना के लागू होने से शिक्षकों को अब इलाज के लिए अपनी जमापूंजी खर्च करने या मेडिकल बिलों के रीइम्ब्र्समेंट (भुगतान वापसी) के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


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