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UP Board : मूल्यांकन केंद्रों पर जलपान भत्ता मंजूर, 29 हजार से अधिक स्कूलों की सूची वेबसाइट पर जारी

Sir Ji Ki Pathshala

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने शैक्षिक सत्र और मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के लिए दो महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। बोर्ड ने एक ओर जहां कॉपियां जांच रहे शिक्षकों के लिए जलपान भत्ते का आदेश जारी किया है, वहीं दूसरी ओर प्रदेश भर के मान्यता प्राप्त स्कूलों की सूची आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है।

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​परीक्षकों को मिलेगा जलपान भत्ता, पुराने बकाए की होगी जांच

​बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं की कॉपियां जांच रहे परीक्षकों के लिए राहत की खबर है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिया है कि मूल्यांकन कार्य में लगे प्रत्येक परीक्षक को प्रतिदिन 25 रुपये जलपान के लिए भुगतान किया जाए।

​सचिव ने प्रयागराज, मेरठ, वाराणसी, बरेली और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों को पत्र लिखकर कड़े निर्देश दिए हैं:

  • ​जिन केंद्रों पर पिछले वर्ष जलपान व्यय का भुगतान नहीं किया गया था, उनकी गहन जांच की जाए।
  • ​दोषियों पर आवश्यक कार्यवाही करते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
  • ​यह सुनिश्चित किया जाए कि इस वर्ष भुगतान में कोई देरी न हो।

​वेबसाइट पर 29,208 स्कूलों का डेटा उपलब्ध

​शिक्षा के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए बोर्ड ने प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त 29,208 माध्यमिक विद्यालयों की सूची सार्वजनिक कर दी है। अब अभिभावक और छात्र एक क्लिक पर स्कूल की वैधता जान सकेंगे।

स्कूलों का संक्षिप्त विवरण:

  • कुल मान्यता प्राप्त विद्यालय: 29,208
  • इंटरमीडिएट स्तर के स्कूल: 18,913
  • हाईस्कूल स्तर के स्कूल: 10,295

​विषयवार मान्यता से रुकेगा फर्जीवाड़ा

​इस बार बोर्ड ने केवल स्कूलों के नाम ही नहीं, बल्कि इंटरमीडिएट स्तर पर उन्हें किन विषयों को पढ़ाने की अनुमति मिली है, इसकी जानकारी भी साझा की है। अक्सर यह देखा गया है कि स्कूल बिना मान्यता के ही कुछ विषयों में छात्रों का प्रवेश ले लेते हैं, जिससे परीक्षा के समय छात्रों का प्रवेश पत्र नहीं आ पाता।

बोर्ड का संदेश: जिलावार सूची जारी होने से अब अमान्य स्कूलों के खेल पर रोक लगेगी। छात्र अब प्रवेश लेने से पहले यह सुनिश्चित कर सकेंगे कि जिस स्कूल में वे पढ़ रहे हैं, उसके पास उस विषय को पढ़ाने की वैधानिक मान्यता है या नहीं।

​यूपी बोर्ड के इन फैसलों से जहाँ एक ओर मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में शुचिता और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।