लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के अन्तः जनपदीय समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया एक बार फिर कानूनी पेच में फंसती नजर आ रही है। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में इस मामले पर लंबी बहस हुई, जिसके बाद न्यायालय ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्पष्ट दिशा-निर्देश (Guidelines) पेश करने को कहा है।
जस्टिस राजीव सिंह ने समझा पूरा मामला
सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने शिक्षकों के समायोजन से जुड़े विभिन्न पहलुओं और आपत्तियों को विस्तार से सुना। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने तर्क दिया कि समायोजन की वर्तमान प्रक्रिया में विसंगतियां हैं, जिससे कई शिक्षकों के हितों का हनन हो रहा है। कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को समझते हुए विभाग को फटकार लगाई और पूछा कि समायोजन के लिए क्या ठोस मानक अपनाए जा रहे हैं।
08 अप्रैल को होगी अगली सुनवाई
काफी देर चली बहस के बाद, कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 08 अप्रैल 2026 की तिथि निर्धारित की है। न्यायालय ने विभाग को आदेश दिया है कि वह अगली सुनवाई तक अपनी गाइडलाइंस को पूरी तरह स्पष्ट करे ताकि प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
अंतरिम आदेश प्रभावी: समायोजन पर 'स्टे' बरकरार
शिक्षकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि कोर्ट द्वारा पहले से दिया गया अंतरिम आदेश (Interim Order) अभी भी प्रभावी है। इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल प्रदेश में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया पर 'स्टे' (रोक) लगा रहेगा। अगली सुनवाई तक विभाग कोई भी अंतिम कदम नहीं उठा सकेगा।


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