Type Here to Get Search Results !

यूपी शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी: स्कूलों में लागू होगा 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' और भर्ती परीक्षाओं में 'जीरो टॉलरेंस' का एलान

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और सरकारी भर्ती परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के लिए दोहरे मोर्चे पर कड़े कदम उठाए हैं। एक ओर जहाँ बेसिक व माध्यमिक स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' पर जोर दिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आगामी भर्ती परीक्षाओं को पूरी तरह नकल विहीन संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।

अर्ली वार्निंग सिस्टम से छात्रों की हाजिरी और भर्ती परीक्षाओं में जीरो टॉलरेंस।

स्कूलों में अर्ली वार्निंग सिस्टम: छात्रों की अनुपस्थिति पर लगेगी लगाम

​अपर मुख्य सचिव (बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रदेश भर के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूलों में छात्रों के ड्रॉपआउट रेट को कम करने के लिए 'अर्ली वार्निंग सिस्टम' को प्रभावी बनाया जाए।

  • मुख्य फोकस: सिस्टम के जरिए उन बच्चों की पहचान की जाएगी जो बिना सूचना लंबे समय से स्कूल नहीं आ रहे हैं।
  • अभिभावकों की भागीदारी: शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे बच्चों की प्रोग्रेस रिपोर्ट और उपस्थिति का डेटा नियमित रूप से अभिभावकों के साथ साझा करें।
  • शत-प्रतिशत नामांकन: 'स्कूल चलो अभियान' के तहत हर जिले में शत-प्रतिशत दाखिले और नियमित कक्षाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।

भर्ती परीक्षाओं पर सख्त पहरा: नकल रोकने के लिए कड़े निर्देश

​इसी कड़ी में मुख्य सचिव एस.पी. गोयल ने भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर उच्च स्तरीय निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग और पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा आयोजित होने वाली आगामी परीक्षाओं में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी।

आगामी परीक्षाओं का कार्यक्रम:

  • सहायक आचार्य परीक्षा: 18 व 19 अप्रैल।
  • होमगार्ड भर्ती परीक्षा: 25, 26 व 27 अप्रैल।

प्रशासनिक मुस्तैदी के प्रमुख बिंदु:

  • डीएम का नेतृत्व: सभी जिलों के जिलाधिकारियों (DM) को परीक्षा व्यवस्था का सीधा नेतृत्व करने के निर्देश दिए गए हैं।
  • सघन चेकिंग: परीक्षा केंद्रों के चप्पे-चप्पे का निरीक्षण और सैनिटाइजेशन किया जाएगा ताकि कोई भी अवांछनीय सामग्री या चिट छिपी न रह सके।
  • त्रुटिहीन व्यवस्था: परीक्षार्थियों को समय पर प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और उनके निर्धारित सीट पर बैठने की व्यवस्था को अनिवार्य किया गया है।
निष्कर्ष: शासन का यह कदम प्रदेश में प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करने के साथ-साथ युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से रोजगार के अवसर प्रदान करने की दिशा में एक बड़ी पहल माना जा रहा है।