प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में शिक्षक भर्ती की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और निर्णायक खबर सामने आई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय (High Court) ने टीजीटी (TGT) और एलटी ग्रेड (LT ग्रेड) शिक्षक भर्ती में शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल करने का निर्देश दिया है। यह फैसला न केवल वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करेगा, बल्कि भविष्य की सभी भर्तियों के लिए भी एक स्पष्ट दिशा तय करेगा।
दरअसल, यह मामला 28 जुलाई 2025 को जारी एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती विज्ञापन से जुड़ा हुआ है, जिसे प्रयागराज निवासी जय हिंद यादव एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (RTE Act) के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया है। विशेष रूप से, विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं किया गया था कि भर्ती किन कक्षाओं के लिए की जा रही है और यह किस कैडर के अंतर्गत आती है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ द्वारा की गई। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि राज्य में लगभग 904 ऐसे शिक्षण संस्थान हैं, जहाँ कक्षा 6 से लेकर कक्षा 12 तक की शिक्षा दी जाती है। इसके बावजूद लोक सेवा आयोग द्वारा यह दावा किया गया कि कक्षा 6 से 8 तक के लिए कोई रिक्तियां नहीं हैं, जिसे न्यायालय ने तर्कसंगत नहीं माना।
न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश अधीनस्थ शैक्षिक (प्रशिक्षित स्नातक श्रेणी) सेवा नियमावली 1983 के नियम 8 में संशोधन आवश्यक है। इस संशोधन के तहत अब टीईटी पास होना अनिवार्य योग्यता के रूप में शामिल किया जाएगा। कोर्ट का मानना है कि जब सीटी (Certificate of Teaching) कैडर को समाप्त कर एलटी/टीजीटी कैडर में समाहित किया जा चुका है, तो ऐसे में टीईटी की अनिवार्यता स्वाभाविक और आवश्यक हो जाती है।
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इसके अतिरिक्त, हाईकोर्ट ने 28 जुलाई 2025 को जारी विज्ञापन में कक्षाओं का स्पष्ट उल्लेख न होने को एक गंभीर त्रुटि माना। न्यायालय ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि वह तत्काल प्रभाव से एक शुद्धि पत्र (Corrigendum) जारी करे, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि यह भर्ती केवल कक्षा 9 और 10 के शिक्षण कार्य के लिए है।
इस फैसले का सीधा असर राज्य के लाखों अभ्यर्थियों पर पड़ेगा। अब वे अभ्यर्थी जो टीईटी उत्तीर्ण नहीं हैं, वे इन भर्तियों में आवेदन नहीं कर सकेंगे। वहीं, टीईटी पास उम्मीदवारों के लिए यह एक सकारात्मक अवसर के रूप में सामने आएगा। इससे भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित होगी।
अंततः, इलाहाबाद हाईकोर्ट का यह निर्णय शिक्षा व्यवस्था को अधिक मजबूत, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह फैसला भविष्य की शिक्षक भर्तियों के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा।


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