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NCERT को मिला मानद विश्वविद्यालय (Deemed University) का दर्जा: अब स्नातक से लेकर PhD तक की मिलेगी डिग्री

Sir Ji Ki Pathshala

NCERT New Update: शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा प्रदान कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय की इस मंजूरी के बाद अब एनसीईआरटी केवल स्कूली पाठ्यक्रम और किताबें बनाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि एक पूर्ण विश्वविद्यालय की तरह स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी (PhD) की डिग्रियां भी प्रदान कर सकेगी।

NCERT Deemed University Status and Degree Programs News

​इस लेख में हम जानेंगे कि इस बदलाव से शिक्षा जगत और छात्रों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और कौन-कौन से संस्थान इसमें शामिल हैं।

​शिक्षा मंत्रालय ने दी हरी झंडी, जल्द जारी होगी अधिसूचना

​नई दिल्ली स्थित एनसीईआरटी मुख्यालय के साथ-साथ इसके देशभर में स्थित क्षेत्रीय संस्थानों के लिए यह एक बड़ा मील का पत्थर है। केंद्र सरकार द्वारा इसी सप्ताह इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इस फैसले के बाद एनसीईआरटी अब अपने स्वयं के डिग्री प्रोग्राम, डिप्लोमा कोर्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स स्वतंत्र रूप से संचालित कर पाएगा।

​इन 6 प्रमुख संस्थानों को भी मिला दर्जा

​एनसीईआरटी के साथ-साथ उसके अंतर्गत आने वाले निम्नलिखित संस्थानों को भी मानद विश्वविद्यालय के दायरे में शामिल किया गया है:

  1. अजमेर (राजस्थान) - क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE)
  2. भुवनेश्वर (ओडिशा) - क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE)
  3. मैसूर (कर्नाटक) - क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE)
  4. शिलांग (मेघालय) - क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE)
  5. भोपाल (मध्य प्रदेश) - क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE)
  6. पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (भोपाल)

​आगामी शैक्षणिक सत्र से शुरू होंगे कोर्स

​अब तक एनसीईआरटी मुख्य रूप से सीबीएसई (CBSE) और विभिन्न राज्य बोर्डों के लिए स्कूली पाठ्यपुस्तकें तैयार करने का काम करती थी। मानद विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद, आगामी शैक्षणिक सत्र से छात्र यहां से सीधे उच्च शिक्षा की डिग्री ले सकेंगे।

​हालांकि, यूजीसी (UGC) ने इस दर्जे के साथ कुछ कठोर शर्तें भी रखी हैं:

  • ​संस्थान अपनी संपत्ति या फंड को सरकार और यूजीसी की अनुमति के बिना किसी अन्य जगह ट्रांसफर नहीं कर सकेगा।
  • ​छात्रों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस निर्धारण में सरकारी नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।

​2025 की रिपोर्ट के बाद मिला फैसला

​एनसीईआरटी ने इस दर्जे के लिए लंबे समय से प्रयास किए थे। यूजीसी ने साल 2023 में कुछ शर्तों के साथ 'लेटर ऑफ इंटेंट' जारी किया था, जिसे पूरा करने के लिए तीन साल का समय दिया गया था। एनसीईआरटी ने अपनी प्रगति रिपोर्ट 2025 में सरकार को सौंपी, जिसके बाद विशेषज्ञ समिति की सकारात्मक सिफारिशों के आधार पर अब इसे मंजूरी दी गई है।

​शोध (Research) और नवाचार पर रहेगा विशेष ध्यान

​एक विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी का मुख्य फोकस अनुसंधान और नवाचार (Research and Innovation) पर होगा। इसके तहत:

  • नए कोर्स: उभरती हुई जरूरतों के अनुसार नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
  • ऑफ-कैंपस और विदेशी कैंपस: तय नियमों के तहत एनसीईआरटी भविष्य में देश के अन्य हिस्सों या विदेश में भी अपने कैंपस खोल सकेगी।
  • शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए और अधिक उच्च स्तरीय शोध कार्य किए जा सकेंगे।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​एनसीईआरटी को मानद विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना भारत की शिक्षा नीति (NEP) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे न केवल शोध कार्य को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि छात्रों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के लिए एक नया और प्रतिष्ठित मंच प्राप्त होगा।

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