इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश में जूनियर हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) उत्तीर्ण होना एक अनिवार्य शर्त नहीं है, विशेषकर उन उम्मीदवारों के लिए जिनकी सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति TET नियम लागू होने से पहले हुई थी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला अंकिता सक्सेना (रिट याचिकाकर्ता) से संबंधित है, जिन्होंने रामपुर के पब्लिक बालिका जूनियर हाई स्कूल में प्रधानाध्यापिका पद के लिए आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया में उन्होंने उच्चतम अंक प्राप्त किए और चयन समिति द्वारा उनका नाम पहले स्थान पर रखा गया। हालांकि, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA), रामपुर ने उनकी नियुक्ति के प्रस्ताव को इस आधार पर खारिज कर दिया कि उनके पास जूनियर हाई स्कूल स्तर का TET प्रमाणपत्र नहीं था।
अदालत का तर्क और निर्णय
मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया गया था। अदालत के निर्णय के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- नियमों की व्याख्या: कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (अध्यापकों की भर्ती और सेवा की शर्तें) नियमावली, 1978 के नियम 4 का विश्लेषण किया। कोर्ट ने पाया कि सहायक अध्यापक के लिए तो TET अनिवार्य है, लेकिन प्रधानाध्यापक की योग्यता के लिए नियम 4(2) में TET का कहीं भी उल्लेख नहीं है।
- पिछली नियुक्तियों का संरक्षण: याचिकाकर्ता की सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति 1 जुलाई 2009 को हुई थी। उस समय TET की कोई आवश्यकता नहीं थी क्योंकि नियमावली में छठा संशोधन (जिसने TET को अनिवार्य बनाया) 5 दिसंबर 2012 से प्रभावी हुआ था।
- अनुभव की वैधता: कोर्ट ने माना कि चूंकि याचिकाकर्ता की सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्ति वैध थी, इसलिए उनके पांच साल के शिक्षण अनुभव को 'शून्य' नहीं माना जा सकता।
हाईकोर्ट का आदेश
अदालत ने राज्य सरकार की अपील को खारिज करते हुए निम्नलिखित निर्देश दिए:
- नियुक्ति की मंजूरी: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को आदेश दिया गया कि वे याचिकाकर्ता की प्रधानाध्यापक पद पर नियुक्ति को मंजूरी दें।
- बकाया वेतन: याचिकाकर्ता को उस तिथि (26 जुलाई 2016) से वेतन के बकाया का भुगतान किया जाए, जब उनकी नियुक्ति को पहली बार अस्वीकार किया गया था।
- ब्याज का प्रावधान: यदि समय सीमा के भीतर बकाया भुगतान नहीं किया जाता है, तो उस पर 6% वार्षिक साधारण ब्याज भी देय होगा।
आपको बताते चलें कि यह निर्णय हाईकोर्ट द्वारा अगस्त 2022 में दिया गया था। यह आदेश उन कई शिक्षकों के लिए राहत देने वाला है जो TET नियमों के लागू होने से पहले सेवा में आए थे और अब पदोन्नति या नई नियुक्तियों के लिए विचार किए जा रहे हैं।
आदेश की PDF डाउनलोड करें


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