नई दिल्ली | विशेष संवाददाता केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी में है। महिला आरक्षण को जल्द से जल्द जमीन पर उतारने के उद्देश्य से सरकार कानून की उन तकनीकी शर्तों में बदलाव कर सकती है, जो इसे नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ती थीं। ताज़ा योजना के अनुसार, सरकार अब 2011 की जनगणना को ही आधार मानकर इसे लागू करने पर विचार कर रही है।
2029 के चुनाव पर नजर: परिसीमन की शर्त में बदलाव
वर्तमान प्रावधानों के मुताबिक, महिला आरक्षण नई जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन के बाद ही लागू होना था। लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार अब इस कानून को 2029 के लोकसभा चुनाव और आगामी विधानसभा चुनावों में ही लागू करना चाहती है। नई जनगणना का इंतजार करने के बजाय 2011 के आंकड़ों का सहारा लेने से न केवल प्रक्रिया तेज होगी, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच जनसंख्या आधारित सीटों के आवंटन का विवाद भी टल सकता है।
लोकसभा की नई तस्वीर: 816 होंगी कुल सीटें
इस संशोधन के जरिए सीटों की संख्या में क्रांतिकारी वृद्धि का प्रस्ताव भी सामने आ रहा है। सरकार लोकसभा और विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या में 50 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। इस नए गणित के तहत, लोकसभा में सीटों की कुल संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो सकती है। इन कुल सीटों में से 33 फीसदी यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएंगी। इस विस्तार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरक्षण लागू होने के बाद भी सदन में पर्याप्त प्रतिनिधित्व बना रहे और मौजूदा जनप्रतिनिधियों के लिए भी संतुलन बना रहे।
राजनैतिक विमर्श और विपक्षी दलों का रुख
इस महत्वपूर्ण कदम को लेकर सरकार ने विपक्षी दलों के साथ संवाद की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को संसद में विभिन्न दलों के नेताओं के साथ चर्चा की। इसमें बीजद, शिवसेना (यूबीटी), राकांपा (एसपी), वायएसआर कांग्रेस और एआईएमआईएम के नेता शामिल रहे।
वहीं, कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे आरक्षण के सिद्धांत के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन वे चाहते हैं कि सरकार आधिकारिक तौर पर एक सर्वदलीय बैठक बुलाए और संशोधन विधेयक के ड्राफ्ट पर विस्तार से चर्चा करे ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
इसी सप्ताह आ सकता है संशोधन विधेयक
माना जा रहा है कि मौजूदा बजट सत्र के दूसरे चरण में सरकार इस सप्ताह के अंत तक संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। इस विधेयक का मुख्य लक्ष्य 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' से "नई जनगणना" वाली अनिवार्य शर्त को हटाकर इसे तुरंत लागू करने योग्य बनाना है।
यदि यह संशोधन पारित होता है, तो यह भारतीय संसदीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार होगा, जिससे नीति-निर्धारण में महिलाओं की भागीदारी अभूतपूर्व रूप से बढ़ जाएगी।


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