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जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती: चयन सूची में बड़ा खेल? 12 अभ्यर्थियों के नाम गायब होने से मचा बवाल

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज | विशेष संवाददाता उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूलों में वर्ष 2021 से अटकी शिक्षक भर्ती एक बार फिर विवादों के घेरे में है। शनिवार को जारी की गई प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक की चयन सूची ने पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कुछ ही घंटों के भीतर संशोधित सूची जारी कर 12 अभ्यर्थियों के नाम बाहर किए जाने से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश है।

हस्ताक्षर विहीन सूची और संशोधित सूची का पेंच

​भर्ती प्रक्रिया की शुरुआत तब विवादित हो गई जब शनिवार को पहली सूची जारी की गई। इसमें 103 प्रधानाध्यापकों के चयन की सूचना दी गई थी। हालांकि, इस सूची पर बेसिक शिक्षा निदेशक के हस्ताक्षर न होने के कारण इसकी प्रमाणिकता पर सवाल उठने लगे।

Junior High School Teacher Recruitment 2021 controversy

​दबाव बढ़ता देख विभाग ने आनन-फानन में संशोधित सूची जारी की, लेकिन इसमें चयनित प्रधानाध्यापकों की संख्या घटकर 91 रह गई। अभ्यर्थियों का सीधा सवाल है कि बिना किसी स्पष्ट स्पष्टीकरण के आखिर सूची से 12 नाम कम क्यों हो गए?

पदों की संख्या में भारी कटौती से अभ्यर्थी मायूस

​भर्ती के विज्ञापन और वर्तमान चयन प्रक्रिया के बीच पदों के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। वर्ष 2021 में जारी विज्ञापन में प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापक के 1504 पद विज्ञापित किए गए थे।

​इसके उलट, वर्तमान में प्रधानाध्यापक के 203 पदों के सापेक्ष केवल 91 अभ्यर्थियों का ही चयन किया गया है। वहीं, सहायक अध्यापक के पदों के लिए केवल 634 अभ्यर्थियों का चयन कर प्रक्रिया को सीमित कर दिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, विभाग ने केवल लगभग 600 विद्यालयों की रिक्तियों की ही सूचना जारी की है, जिससे पदों की संख्या में भारी कमी आई है।

नियमों के उल्लंघन का आरोप

​विवाद का एक अन्य तकनीकी पहलू 'अनंतिम चयन सूची' (Provisional List) को लेकर है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, संबंधित नियमावली में अनंतिम सूची जारी करने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके बावजूद, पहली सूची को अनंतिम मानकर जारी किया गया, जिससे प्रक्रियागत और कानूनी विवाद और गहरा गया है।

लंबे इंतजार के बाद भी अधूरी उम्मीदें

​गौरतलब है कि यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2021 से लंबित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि एक तरफ पदों की संख्या घटा दी गई और दूसरी तरफ चयन सूची में विसंगतियां बरती जा रही हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल द्वारा शुक्रवार को दी गई जानकारी के बाद से ही संशय की स्थिति बनी हुई है।

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