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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: वर्षों तक आउटसोर्सिंग पर काम कराना शोषण, सरकार को दी 'आदर्श नियोक्ता' बनने की नसीहत

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी विभागों में नियमित भर्तियों को टालकर वर्षों तक आउटसोर्सिंग के जरिए काम कराने की प्रथा पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि किसी कर्मचारी का कार्य स्थायी प्रकृति का है और विभाग को उसकी निरंतर आवश्यकता है, तो उसे लंबे समय तक आउटसोर्सिंग के भरोसे छोड़ना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि यह सीधे तौर पर शोषण (Exploitation) को बढ़ावा देना है।

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​यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान ने बरेली नगर निगम में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर कफी अहमद खान की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याची 2011 से ही नगर निगम में अपनी सेवाएं दे रहा था। शुरुआत में उसे दैनिक वेतन पर रखा गया, लेकिन बाद में उसे ठेकेदार के माध्यम से आउटसोर्सिंग पर डाल दिया गया। 13 साल की सेवा के बाद भी जब नियमितीकरण की मांग खारिज हुई, तो मामला हाईकोर्ट पहुँचा।

कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

​सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार और सरकारी संस्थानों की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल उठाए:

  • राज्य की भूमिका: कोर्ट ने याद दिलाया कि "राज्य एक आदर्श नियोक्ता (Model Employer) होता है।" उसका कर्तव्य अपने कर्मचारियों का शोषण करना नहीं, बल्कि उनके साथ निष्पक्ष और जिम्मेदारी भरा व्यवहार करना है।
  • नियमित भर्ती की अनदेखी: कोर्ट ने चिंता जताई कि आउटसोर्सिंग का सहारा लेकर सरकार नियमित भर्ती प्रक्रिया को नजरअंदाज कर रही है।
  • भविष्य का नुकसान: लंबे समय तक अस्थायी पदों पर काम करने के कारण कर्मचारी सरकारी नौकरी के लिए निर्धारित आयु सीमा (Age Limit) पार कर जाते हैं, जिससे वे भविष्य में होने वाली नियमित भर्तियों में शामिल होने का अवसर भी खो देते हैं।
  • पदों में वृद्धि: यदि काम का बोझ स्थायी है, तो सरकार को स्वीकृत पदों की संख्या बढ़ानी चाहिए, न कि ठेकेदारी प्रथा के पीछे छिपना चाहिए।

कोर्ट का आदेश

​इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली नगर आयुक्त द्वारा नियमितीकरण को खारिज करने वाले पुराने आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने नगर निगम को निर्देश दिया है कि याची के नियमितीकरण पर 4 महीने के भीतर कानून के अनुसार विचार कर नया निर्णय लिया जाए।

​यह फैसला राज्य के उन सभी विभागों के लिए एक चेतावनी है जो बजट बचाने या प्रक्रिया से बचने के लिए आउटसोर्सिंग को ढाल बनाते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 'जरूरी काम के लिए स्थायी पद' का सिद्धांत ही न्यायसंगत है।

FAQ: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. क्या आउटसोर्सिंग कर्मचारी नियमित हो सकते हैं?

हाँ, इलाहाबाद हाईकोर्ट के ताजा आदेश के अनुसार, यदि कार्य स्थायी प्रकृति का है और कर्मचारी लंबे समय से कार्यरत है, तो विभाग को नियमितीकरण पर विचार करना होगा।

2. हाईकोर्ट ने किसे 'आदर्श नियोक्ता' कहा है?

कोर्ट के अनुसार, राज्य (सरकार) को एक आदर्श नियोक्ता होना चाहिए जिसे अपने कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए

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