प्रयागराज | उत्तर प्रदेश में पांच साल के लंबे इंतजार के बाद आयोजित होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET 2026) विवादों के घेरे में आ गई है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की नई गाइडलाइंस ने बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत हजारों सेवारत शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बीच, आयोग ने कई विशिष्ट योग्यताधारी शिक्षकों को आवेदन प्रक्रिया से बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
क्या है सुप्रीम कोर्ट का अनिवार्य टीईटी (TET) आदेश?
सुप्रीम कोर्ट ने 1 सितंबर के अपने ऐतिहासिक आदेश में स्पष्ट किया है कि कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाने वाले सभी सरकारी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
- 2 साल की समयसीमा: 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को अपनी सेवा सुरक्षित रखने के लिए आगामी 2 वर्षों के भीतर टीईटी पास करनी होगी।
- पदोन्नति (Promotion): भविष्य में प्रमोशन पाने के लिए संबंधित संवर्ग की टीईटी पास करना अनिवार्य है।
- छूट: केवल उन शिक्षकों को राहत दी गई है जिनकी सेवानिवृत्ति (Retirement) में 5 वर्ष से कम का समय बचा है।
इन शिक्षकों को लगा बड़ा झटका: पात्रता सूची से बाहर
चयन आयोग द्वारा जारी नवीनतम गाइडलाइन में उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की टीईटी के लिए बीएड (B.Ed) आधारित शिक्षकों को तो मौका दिया गया है, लेकिन निम्नलिखित वर्ग के हजारों शिक्षकों को 'अपात्र' घोषित कर बाहर कर दिया गया है:
- विशिष्ट बीटीसी अभ्यर्थी: वे शिक्षक जिन्होंने DPed, BPed और CPEd के आधार पर विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया था।
- समानता का उल्लंघन: अध्यापक सेवा नियमावली 1981 में बीटीसी और विशिष्ट बीटीसी को समकक्ष माना गया है। 2013 की 29,334 गणित-विज्ञान भर्ती में भी इन्हें मौका मिला था, लेकिन UP-TET 2026 में इन्हें अवसर नहीं दिया जा रहा।
- पदोन्नति का रास्ता बंद: इन शिक्षकों को शामिल न करने से प्राथमिक स्कूलों में कार्यरत इन योग्यताधारियों के प्रमोशन के रास्ते भी बंद हो गए हैं।
नौकरी पर मंडराया संकट
शिक्षकों के बीच इस समय सबसे बड़ा डर नौकरी जाने का है। यदि आयोग इन शिक्षकों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं देता है, तो वे सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित 2 साल की समयसीमा के भीतर टीईटी पास नहीं कर पाएंगे। ऐसी स्थिति में उनकी सेवा की निरंतरता पर कानूनी तलवार लटक सकती है।
UP-TET 2026 आवेदन में 'सैलरी स्लिप' अनिवार्य
इस बार की टीईटी परीक्षा सामान्य अभ्यर्थियों के मुकाबले सेवारत शिक्षकों के लिए अधिक सख्त है। ऑनलाइन आवेदन के दौरान शिक्षकों को निम्नलिखित दस्तावेज और जानकारी देनी होगी:
- लेटेस्ट सैलरी स्लिप (वेतन पर्ची): पीडीएफ फॉर्मेट में अपलोड करना अनिवार्य है।
- मानव संपदा कोड: शिक्षक की विशिष्ट आईडी।
- अन्य विवरण: जॉइनिंग की तारीख, रिटायरमेंट की तारीख और वर्तमान विद्यालय का नाम।
असमंजस में हजारों शिक्षक
उत्तर प्रदेश में 1999, 2004 और 2007-08 के विशिष्ट बीटीसी बैच के हजारों शिक्षक इस समय मानसिक दबाव में हैं। एक तरफ सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश है और दूसरी तरफ चयन आयोग की तकनीकी खामियां। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें भी टीईटी में बैठने का समान अवसर दिया जाए ताकि उनकी वर्षों की सेवा और भविष्य सुरक्षित रह सके।


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