प्रयागराज ब्यूरो उत्तर प्रदेश में पांच वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित होने जा रही शिक्षक पात्रता परीक्षा (UP-TET) इस बार अपने नियमों और मूल्यांकन पद्धति को लेकर चर्चा में है। नवनिर्मित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने संकेत दिए हैं कि आगामी परीक्षा में 'नॉर्मलाइजेशन' (मानकीकरण) की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, जिससे अभ्यर्थियों के बीच एक बार फिर असंतोष की स्थिति बन सकती है।
बहु-पालियों में परीक्षा और अंकों का गणित
आयोग द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक, यदि आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की तादाद बहुत अधिक होती है और एक ही दिन में परीक्षा संपन्न कराना संभव नहीं होता, तो इसे कई दिनों या अलग-अलग शिफ्ट में आयोजित किया जाएगा। ऐसी स्थिति में, विभिन्न प्रश्नपत्रों के कठिनाई स्तर को संतुलित करने के लिए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूला लागू किया जाएगा।
- समान मानक: इसके लिए SSC और UPSSSC जैसे भर्ती बोर्डों द्वारा अपनाए जाने वाले गणितीय फॉर्मूले का उपयोग होगा।
- छात्रों की चिंता: अभ्यर्थियों का मानना है कि इस प्रक्रिया से अक्सर मेधावी छात्रों के अंक कम हो जाते हैं, जैसा कि पूर्व में अन्य परीक्षाओं में देखा गया है। विशेष रूप से कठिन शिफ्ट में बैठने वाले उम्मीदवारों को अंकों के इस खेल में नुकसान होने का डर सता रहा है।
विरोध की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 'नॉर्मलाइजेशन' का मुद्दा पहले भी विवादों में रहा है। हाल ही में UPPSC ने पीसीएस और आरओ/एआरओ की प्रारंभिक परीक्षाओं में इसे लागू करने का प्रयास किया था, लेकिन हजारों छात्रों के जबरदस्त विरोध प्रदर्शन के बाद आयोग को अपना फैसला वापस लेना पड़ा था। तब आरओ/एआरओ जैसी बड़ी परीक्षा करीब 11 लाख छात्रों के लिए एक ही दिन में आयोजित की गई थी। अब टीईटी में इसी नियम की वापसी से छात्र आंदोलन की सुगबुगाहट फिर से शुरू हो सकती है।
पहली बार 'डिजिटल' होंगे प्रमाणपत्र: डिजिलॉकर की सुविधा
इस बार की परीक्षा में तकनीकी सुधारों पर भी जोर दिया जा रहा है। आयोग ने निर्णय लिया है कि सफल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र अब भौतिक रूप के बजाय डिजिलॉकर (DigiLocker) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में प्रदान किए जाएंगे।
- लाइफटाइम वैलिडिटी: जारी होने की तारीख से ये सर्टिफिकेट अब जीवन भर के लिए मान्य होंगे।
- सुधार की गुंजाइश नहीं: प्रमाणपत्र जारी होने के बाद फोटो, जाति या श्रेणी जैसे विवरणों में कोई बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
- सावधानी जरूरी: आयोग ने उम्मीदवारों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फॉर्म भरते समय कोई गलती न करें, क्योंकि बाद में संशोधन का अवसर नहीं मिलेगा।


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