लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए 'उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956' में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। राज्यपाल की अनुमति के बाद 'कार्मिक अनुभाग-1' द्वारा उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण (संशोधन) नियमावली, 2026 की अधिसूचना जारी कर दी गई है।
इन नए नियमों का मुख्य उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाना और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना है। आइए जानते हैं कि नए संशोधनों के बाद कर्मचारियों के लिए क्या बदल गया है:
शेयर और स्टॉक मार्केट निवेश पर अब कड़ी नजर
नए नियमों के तहत नियम-21 में बड़ा बदलाव किया गया है। अब निवेश को लेकर सीमाएं और सूचना देने की प्रक्रिया को और स्पष्ट किया गया है:
- सूचना देना अनिवार्य: यदि कोई सरकारी कर्मचारी एक कैलेंडर वर्ष में अपने 6 महीने के मूल वेतन (Basic Pay) से अधिक की राशि स्टॉक, शेयर या अन्य निवेशों में लगाता है, तो उसे इसकी सूचना 'समुचित प्राधिकारी' (Appropriate Authority) को अनिवार्य रूप से देनी होगी।
- हितों का टकराव: कोई भी कर्मचारी ऐसा निवेश नहीं करेगा जिससे उसके सरकारी कर्तव्यों के पालन में कोई बाधा या प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
चल-अचल संपत्ति की घोषणा अब हर साल
सबसे महत्वपूर्ण बदलाव नियम-24 में किया गया है, जो संपत्ति के विवरण से संबंधित है:
- सालाना विवरण: पहले अचल संपत्ति का विवरण पांच साल के अंतराल पर देना होता था, लेकिन अब हर सरकारी कर्मचारी को प्रत्येक वर्ष (Every Year) अपनी चल और अचल संपत्ति की घोषणा करनी होगी।
- पारिवारिक संपत्ति का ब्यौरा: इस घोषणा में न केवल कर्मचारी की अपनी संपत्ति, बल्कि उसके परिवार के सदस्यों (पत्नी/पति या आश्रित) के नाम पर खरीदी गई या विरासत में मिली संपत्ति, शेयर और अन्य निवेशों का पूरा विवरण देना होगा।
चल संपत्ति के लेनदेन की नई सीमा
चल संपत्ति (Movable Property) जैसे वाहन, आभूषण आदि की खरीद-बिक्री की सूचना देने की सीमा को भी संशोधित किया गया है:
- अब यदि कोई कर्मचारी अपने दो महीने के मूल वेतन से अधिक मूल्य की किसी चल संपत्ति का लेनदेन (खरीद या बिक्री) करता है, तो उसे तत्काल सक्षम प्राधिकारी को इसकी रिपोर्ट करनी होगी। इससे पहले यह सीमा कम थी।
भ्रष्टाचार पर लगाम और पारदर्शिता
सरकार का तर्क है कि इन संशोधनों से कर्मचारियों की आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित करने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी। सालाना रिटर्न भरने से शासन के पास कर्मचारियों की वित्तीय स्थिति का अद्यतन (Updated) रिकॉर्ड रहेगा।
मुख्य बिंदु: यह नियमावली 11 मार्च, 2026 से प्रभावी हो गई है और प्रदेश के सभी सरकारी विभागों के कर्मचारियों पर समान रूप से लागू होगी।






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