लखनऊ: अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ अपने आंदोलन और कानूनी लड़ाई को और तेज करने का निर्णय लिया है। सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ-साथ महासंघ अब सड़कों पर भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगा।
13 अप्रैल को जिला स्तर पर 'मशाल जुलूस'
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने घोषणा की है कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आगामी 13 अप्रैल को देश के सभी जिलों में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह कदम सरकार और संबंधित विभागों तक शिक्षकों की नाराजगी पहुँचाने के लिए उठाया जा रहा है।
"23 शिक्षक संगठनों का यह महासंघ ब्लॉक से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक एकजुट है। हम किसी भी कीमत पर शिक्षकों के हितों के साथ समझौता नहीं होने देंगे।" - सुशील कुमार पांडे
सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की तैयारी
आगामी अदालती कार्यवाही को लेकर रविवार को दिल्ली में महासंघ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में वरिष्ठ अधिवक्ताओं के साथ कानूनी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
- संभावित सुनवाई: 2 अप्रैल के बाद किसी भी तिथि पर।
- प्रभावित शिक्षक: उत्तर प्रदेश के लगभग 2 लाख और देशभर के 18 लाख शिक्षक।
- रणनीति: साक्ष्यों और तथ्यों के साथ कोर्ट में पक्ष रखना ताकि सेवा सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
लीगल टीम का बड़ा दावा
महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि अधिवक्ताओं की राय के अनुसार याचिका को और मजबूत बनाया गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि सरकार पर इस एकजुटता का दबाव बढ़ रहा है और शिक्षकों के पक्ष में सकारात्मक परिणाम आने की पूरी उम्मीद है।
महासंघ ने सभी शिक्षकों से अपील की है कि वे इस संघर्ष में 'कंधे से कंधा मिलाकर' साथ दें ताकि 18 लाख परिवारों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।


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