लखनऊ: देश में वर्ष 2011 के बाद एक बार फिर बड़े स्तर पर जनगणना की तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। 'जनगणना-2027' के माध्यम से न केवल देश की सामाजिक-आर्थिक तस्वीर साफ होगी, बल्कि पहली बार सरकार आपके खान-पान की आदतों का डेटा भी जुटाएगी। इस डिजिटल जनगणना का उद्देश्य भविष्य की योजनाओं, विशेषकर राशन वितरण और पोषण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाना है।
तीन चरणों में पूरी होगी प्रक्रिया
प्रशासन ने इस विशाल कार्य को तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया है:
- पहला चरण (20 मई से 20 जून): इसमें मकानों की सूची तैयार की जाएगी। बुनियादी जानकारियों जैसे—बिजली, पानी, शौचालय, वाहनों की संख्या और मुख्य अनाज के उपभोग पर 32 सवाल पूछे जाएंगे।
- दूसरा चरण (अगली फरवरी): यह चरण सबसे महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि इसमें जाति, धर्म, भाषा, शिक्षा और रोजगार से जुड़े व्यक्तिगत विवरण जुटाए जाएंगे।
- तीसरा चरण (मार्च 2027): इस अंतिम चरण में डेटा का रिवीजन किया जाएगा और जन्म-मृत्यु जैसे अपडेट दर्ज किए जाएंगे।
थाली में क्या है? पहली बार पूछे जाएंगे 'अनाज' पर सवाल
इस बार की जनगणना में एक अनोखा पहलू जोड़ा गया है। प्रगणक (Enumerators) हर परिवार से पूछेंगे कि उनकी थाली में सबसे ज्यादा कौन सा अनाज—चावल, गेहूं, ज्वार, बाजरा या मक्का—शामिल होता है।
उद्देश्य: क्षेत्रीय जरूरतों को समझना ताकि पोषण आधारित सरकारी योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके।
हाईटेक होगी गणना: मोबाइल ऐप का इस्तेमाल
यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी। इसके लिए 'मोबाइल एचएलओ ऐप' तैयार किया गया है, जिसमें ऑफलाइन डेटा भरने की सुविधा भी है। बहराइच, बुलंदशहर और प्रयागराज जैसे जिलों में इसका सफल रिहर्सल भी किया जा चुका है।
पाँच लाख से अधिक कर्मचारी संभालेंगे कमान
प्रदेश में इस विशाल कार्य के लिए 5 लाख से ज्यादा कर्मचारियों और शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।
- प्रगणक (Enumerators): लगभग 4.5 लाख।
- सुपरवाइजर: 75 हजार।
- लक्ष्य: एक प्रगणक को 30 दिनों में 150 घर या लगभग 800 की आबादी कवर करनी होगी।


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