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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा रद्द करना सही, 224 याचिकाएं खारिज

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रियाओं की शुचिता को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा-2025 के परिणामों को निरस्त करने के सरकार के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया है। इसके साथ ही, न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने कुमारी लक्ष्मी समेत 224 अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2025 रद्द करना सही: हाईकोर्ट

परीक्षा की निष्पक्षता सर्वोपरि

​सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में निष्पक्षता और पारदर्शिता से समझौता नहीं किया जा सकता। कोर्ट के अनुसार, केवल लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित हो जाना अंतिम चयन का आधार नहीं माना जा सकता, विशेषकर तब जब साक्षात्कार (Interview) की प्रक्रिया अभी बाकी हो।

​राज्य सरकार के पक्ष को मजबूती देते हुए पीठ ने कहा कि सरकार को किसी भी ऐसी परीक्षा प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता जो त्रुटिपूर्ण या संदिग्ध हो।

STF जांच में हुआ था पेपर लीक का खुलासा

​भर्ती प्रक्रिया पर संकट तब खड़ा हुआ जब अप्रैल 2025 में आयोजित हुई इस परीक्षा के तुरंत बाद पेपर लीक के आरोप लगे।

  • कुल पद: 910 रिक्तियां।
  • परीक्षा केंद्र: 52 केंद्रों पर दो दिनों तक परीक्षा चली।
  • जांच का परिणाम: स्पेशल टास्क फोर्स (STF) की जांच में पुष्टि हुई कि प्रश्नपत्र लीक हुआ था, जिससे सीमित संख्या में ही सही, लेकिन अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ मिला।

​इसी रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए और परीक्षा रद्द करने की सिफारिश की गई थी।

एक अन्य मामला: दूसरी शादी और शिक्षक पद की पात्रता

​इसी लेख में हाईकोर्ट की एक अन्य पीठ (न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान) का भी जिक्र है, जिसमें शिक्षक बनने की पात्रता पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिया गया।

  • नियम: यदि किसी महिला ने ऐसे पुरुष से विवाह किया है जिसकी पहली पत्नी जीवित है, तो वह शिक्षक सेवा नियमावली 1981 के नियम 12 के तहत पद के लिए अयोग्य मानी जाएगी।
  • कोर्ट का रुख: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यद्यपि नियुक्ति से पहले की गई दूसरी शादी के लिए अनुशासनात्मक दंड नहीं दिया जा सकता, लेकिन यह नियुक्ति की वैधता को समाप्त करने का ठोस आधार है। यह मामला मऊ की एक सहायक शिक्षिका की सेवा समाप्ति से जुड़ा था, जिसकी नियुक्ति 2015 में हुई थी।

अभ्यर्थियों के लिए आगे की राह

​असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती मामले में कोर्ट ने राहत देते हुए कहा है कि जो अभ्यर्थी पूर्व में शामिल हुए थे, उन्हें नए सिरे से होने वाली लिखित परीक्षा में भाग लेने का पूरा अवसर मिलेगा। नई परीक्षा का कार्यक्रम विभाग द्वारा पहले ही जारी किया जा चुका है।


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