पटना/मुजफ्फरपुर: बिहार शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों (कक्षा 1 से 5) में बहाल बीएड योग्यताधारी शिक्षकों को एक बड़ा झटका दिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि इन शिक्षकों को उनकी नियुक्ति या प्रशिक्षण की तिथि से 'प्रशिक्षित वेतनमान' का लाभ नहीं दिया जाएगा। प्राथमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में शिक्षकों द्वारा दायर किए गए दावों को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
बिहार में वर्ष 2014 के आसपास कई शिक्षक बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक कक्षाओं के लिए बहाल हुए थे। इन शिक्षकों की मांग थी कि उन्हें डीपीई (Diploma in Primary Education) प्रशिक्षित शिक्षकों की तर्ज पर नियुक्ति तिथि या प्रशिक्षण पूरा होने की तारीख से ही उच्च वेतनमान दिया जाए। ये शिक्षक पिछले कई वर्षों से इस मांग को लेकर संघर्ष कर रहे थे।
विभाग ने क्यों खारिज किया दावा?
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि बीएड शिक्षकों और डीपीई प्रशिक्षित शिक्षकों की स्थिति में जमीन-आसमान का अंतर है:
- ब्रिज कोर्स की अनिवार्यता: 2010 के नियमों के अनुसार, कक्षा 1 से 5 में नियुक्त बीएड शिक्षकों के लिए 6 महीने का विशेष ब्रिज कोर्स करना अनिवार्य था। इन शिक्षकों को इस कोर्स को उत्तीर्ण करने की तिथि से ही प्रशिक्षित माना जा रहा है।
- डीपीई से तुलना गलत: विभाग ने कहा कि जिन शिक्षकों को 1999 से 2005 के बीच नियुक्ति तिथि से लाभ मिला था, वे विशेष परिस्थितियों में बहाल हुए थे और उनके प्रशिक्षण में विभागीय देरी हुई थी। बीएड शिक्षकों के मामले में ऐसी कोई विभागीय देरी नहीं पाई गई है।
- पात्रता में अंतर: बीएड डिग्री को प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5) के लिए सीधे तौर पर पूर्ण प्रशिक्षण नहीं माना गया है, जब तक कि ब्रिज कोर्स पूरा न हो जाए।
प्रदेश भर के शिक्षकों पर पड़ेगा असर
मुजफ्फरपुर समेत पूरे बिहार के हजारों शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे। विभाग के इस कड़े रुख से यह साफ हो गया है कि अब इन शिक्षकों को ब्रिज कोर्स उत्तीर्ण करने की तिथि से ही प्रशिक्षित वेतनमान देय होगा, न कि उनकी पिछली सेवाओं या नियुक्ति की तारीख से।
"2014 में इन शिक्षकों की बहाली बीएड अप्रशिक्षित के तौर पर हुई थी। नियमानुसार इन्हें 6 महीने का प्रशिक्षण लेना अनिवार्य था, जिसे पूरा करने के बाद ही इन्हें प्रशिक्षित श्रेणी में रखा जा सकता है।"
— निदेशक

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