प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने और शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग एक बड़ी योजना पर काम कर रहा है। अब नगर क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती स्वीकृत पदों के पुराने ढर्रे पर नहीं, बल्कि शिक्षा का अधिकार (RTE) के कड़े मानकों के अनुसार की जाएगी।
छात्र-शिक्षक अनुपात बनेगा आधार
बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल के संकेतों के अनुसार, अब नगर क्षेत्र (Urban Cadre) के विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति केवल रिक्त पदों को देखकर नहीं होगी। इसके बजाय, स्कूल में नामांकित छात्र संख्या और शिक्षकों के अनुपात (Student-Teacher Ratio) को मुख्य आधार बनाया जाएगा। इसका सीधा लाभ उन स्कूलों को मिलेगा जहाँ छात्र संख्या तो अधिक है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है।
दशकों पुरानी समस्या का समाधान
पिछले एक दशक से अधिक समय से ग्रामीण क्षेत्र (Rural Cadre) से नगर क्षेत्र के स्कूलों में शिक्षकों का स्थानांतरण या तैनाती नहीं हो पाई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि शहर के कई स्कूल केवल शिक्षा मित्रों के भरोसे चल रहे हैं।
- नियम: वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, नगर क्षेत्र में सीधी भर्ती नहीं होती। ग्रामीण क्षेत्र में 10 वर्ष की सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को ही नगर क्षेत्र में तैनाती का विकल्प मिलता है।
- पिछली कोशिशें: पूर्व महानिदेशक विजय किरन आनंद ने भी इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था, लेकिन अनुमति न मिलने के कारण प्रक्रिया अटक गई थी।
शैक्षिक गुणवत्ता में होगा सुधार
नई योजना का मुख्य उद्देश्य नगर क्षेत्र के स्कूलों में गिरते शैक्षिक स्तर को संभालना है। आरटीई मानकों के पालन से:
- शिक्षकों का वितरण समान और तर्कसंगत होगा।
- अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को प्राथमिकता के आधार पर शिक्षक मिलेंगे।
- नगर और ग्रामीण कैडर के बीच के असंतुलन को कम किया जा सकेगा।
बेसिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि जैसे ही शासन से इस नई कार्ययोजना को औपचारिक स्वीकृति मिल जाएगी, नियमानुसार तैनाती की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। इससे हजारों शिक्षकों के तबादले की राह खुलने की भी उम्मीद है।


Social Plugin