प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारी हितों की रक्षा करते हुए एक महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी को अनुशासनात्मक कार्यवाही के बाद केवल 'चेतावनी' देकर छोड़ दिया जाता है, तो उसे दंड नहीं माना जाएगा। ऐसी स्थिति में कर्मचारी अपनी निलंबन या बर्खास्तगी अवधि के पूरे वेतन और भत्तों को पाने का कानूनी रूप से हकदार है।
'काम नहीं तो वेतन नहीं' का सिद्धांत यहाँ लागू नहीं
न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की एकल पीठ ने बुलंदशहर की सफाई कर्मचारी मोहिनी देवी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि जब किसी कर्मचारी को जांच में दोषी नहीं पाया जाता, तो यह माना जाएगा कि वह काम करने के लिए हमेशा तैयार था। उसे विभाग की गलत कार्यवाही के कारण जबरन काम से दूर रखा गया। इसलिए, विभाग 'काम नहीं तो वेतन नहीं' (No Work No Pay) के आधार पर वेतन रोकने का तर्क नहीं दे सकता।
क्या था पूरा मामला?
याची मोहिनी देवी, जो नगर पालिका परिषद गुलावठी में कार्यरत थीं, उन्हें 2002 में निलंबित और 2003 में बर्खास्त कर दिया गया था। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 2012 में हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी रद्द कर दी। विभाग ने पुनः जांच की और 2013 में उन्हें 'चेतावनी' देकर बहाल तो कर दिया, लेकिन 2003 से 2012 तक के 9 वर्षों का वेतन देने से मना कर दिया। विभाग का तर्क था कि इस अवधि में उन्होंने कोई कार्य नहीं किया।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां:
- चेतावनी दंड नहीं है: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली-1999 के तहत 'चेतावनी' कोई निर्धारित दंड नहीं है।
- विभाग की गलती का खामियाजा कर्मचारी क्यों भुगते?: अदालत ने कहा कि यदि विभाग ने गलत तरीके से कर्मचारी को काम से रोका है, तो बहाली के बाद उसे पूर्ण आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।
- 9 साल का एरियर देने का आदेश: हाईकोर्ट ने मेरठ मंडलायुक्त के पुराने आदेश को रद्द करते हुए विभाग को आदेश दिया है कि मोहिनी देवी को 13 जून 2003 से 3 दिसंबर 2012 तक का पूरा पिछला वेतन और भत्ते 3 महीने के भीतर भुगतान किए जाएं।
निष्कर्ष:
हाईकोर्ट के इस फैसले से उन हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलेगी जो छोटी-मोटी विभागीय जांच के नाम पर सालों तक अपने वेतन लाभ से वंचित रहते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अनुशासनात्मक कार्यवाही के नाम पर कर्मचारियों का शोषण नहीं किया जा सकता।


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