Type Here to Get Search Results !

नियुक्ति से पूर्व की दूसरी शादी सेवा समाप्ति का आधार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के आचरण और सेवा नियमावली को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवा में आने से पहले किए गए किसी भी कृत्य को 'सेवाकाल के दौरान अनुचित आचरण' की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

Allahabad High Court Decision

​मुख्य बिंदु: सेवा पूर्व का आचरण और अनुशासन

​न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने याचिकाकर्ता रीना की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 'उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956' का नियम 29 केवल उन कृत्यों पर लागू होता है जो एक कर्मचारी द्वारा सरकारी सेवा में रहने के दौरान किए गए हों।

  • मामला क्या था? याचिकाकर्ता को 2015 में असिस्टेंट टीचर के पद पर नियुक्त किया गया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने 2009 में (नियुक्ति से 6 साल पहले) एक ऐसे व्यक्ति से शादी की जिसकी पहली पत्नी जीवित थी और पहली शादी कायम थी।
  • कोर्ट का तर्क: चूंकि यह विवाह सेवा में आने से बहुत पहले हुआ था, इसलिए इसे सेवा के दौरान 'अनुचित आचरण' मानकर अनुशासनात्मक कार्रवाई या सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता।

​नियुक्ति की पात्रता पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी

​भले ही कोर्ट ने 'अनुचित आचरण' के आधार पर बर्खास्तगी को गलत माना हो, लेकिन 'उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा शिक्षक सेवा नियमावली, 1981' के संदर्भ में एक बड़ी चेतावनी भी दी है।

नियम 12 का उल्लंघन: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई उम्मीदवार ऐसे व्यक्ति से विवाह करता है जिसकी पहली शादी अस्तित्व में है, तो वह नियम 12 के तहत शिक्षक पद के लिए अयोग्य माना जाएगा।

इस निर्णय से यह स्पष्ट होता है कि विभाग किसी कर्मचारी को पुरानी व्यक्तिगत बातों के लिए 'अनुशासनहीनता' के नाम पर दंडित नहीं कर सकता, लेकिन यदि वह बात सरकारी सेवा की प्रवेश शर्तों (Eligibility Criteria) का उल्लंघन करती है, तो नियुक्ति की वैधता पर संकट जरूर आ सकता है। 

Top Post Ad

Bottom Post Ad