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यूपी सरकार की सख्ती: संपत्ति का ब्यौरा न देने वाले कर्मचारियों और वेतन जारी करने वाले अधिकारियों पर गिरेगी गाज

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ: उत्तर प्रदेश शासन ने राज्य कर्मचारियों द्वारा अपनी चल-अचल संपत्ति का विवरण 'मानव संपदा पोर्टल' पर दर्ज न कराए जाने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। शासन ने न केवल लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, बल्कि उन अधिकारियों को भी रडार पर लिया है जिन्होंने नियम विरुद्ध ऐसे कर्मचारियों का वेतन जारी किया है।

​उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव, मदन मोहन त्रिपाठी द्वारा जारी पत्र (संख्या-70/सैंतालीस-का-5-2026) के अनुसार, राज्य सरकार ने पहले ही यह अनिवार्य किया था कि सभी कर्मचारी 31 जनवरी 2026 तक अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड कर दें।

​इसके बावजूद, कई विभागों में न तो विवरण दर्ज किया गया और न ही पोर्टल पर डेटा अपडेट करने में विफल रहने वाले कर्मचारियों का वेतन रोका गया।

​शासन के कड़े निर्देश

​जारी किए गए आधिकारिक पत्र में निम्नलिखित मुख्य बातें कही गई हैं:

    • वेतन आहरण पर स्पष्टीकरण: यदि किसी कर्मचारी ने 31 जनवरी तक अपनी संपत्ति का विवरण पोर्टल पर अपलोड नहीं किया था और फिर भी उसका वेतन जारी कर दिया गया, तो संबंधित आहरण-वितरण अधिकारी (DDO) को इसका जवाब देना होगा।
    • अनुशासनात्मक कार्रवाई: जिन कर्मियों ने निर्धारित अवधि में विवरण दर्ज नहीं किया है, उनके विरुद्ध तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
    • एक सप्ताह की समय सीमा: विभाग स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर की गई कार्रवाई से शासन को अवगत कराना होगा।
    • डेडलाइन: शासन ने 25 फरवरी 2026 तक उन सभी अधिकारियों की सूची मांगी है जिन्होंने नियम का उल्लंघन कर वेतन जारी किया।

​क्यों जरूरी है संपत्ति का विवरण?

​उत्तर प्रदेश सरकार प्रशासन में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 'मानव संपदा पोर्टल' का उपयोग कर रही है। चल-अचल संपत्ति का विवरण देना सेवा नियमावली का हिस्सा है, जिससे सरकारी सेवकों की आय और संपत्ति की निगरानी की जा सके।

यूपी सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर: संपत्ति का ब्यौरा न देने पर रुकेगा वेतन, शासन सख्त।


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