लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया एक बार फिर सुर्खियों में है। आरक्षण घोटाले और विसंगतियों के आरोपों को लेकर नाराज अभ्यर्थी आज (सोमवार को) एक बार फिर सड़कों पर उतर आए। न्याय की मांग को लेकर सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव करने के लिए कूच किया।
हाथों में तख्तियां और बैनर लिए अभ्यर्थी नारेबाजी करते हुए जैसे ही डिप्टी सीएम के आवास की ओर बढ़े, मौके पर भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग कर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों के बीच काफी देर तक गतिरोध बना रहा। पुलिस ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।
अभ्यर्थियों का दर्द: "सरकार नहीं कर रही ठोस पहल"
प्रदर्शन कर रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले कई महीनों से मानसिक प्रताड़ना झेल रहे हैं। उनका मुख्य आरोप है कि:
- भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों का सही पालन नहीं किया गया।
- मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद, सरकार की ओर से पैरवी में वह तत्परता नहीं दिखाई जा रही है, जिससे उन्हें जल्द न्याय मिल सके।
- सरकार की ओर से अभी तक कोई 'ठोस पहल' या समाधान का रास्ता नहीं निकाला गया है।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन, पर चेतावनी भी
अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से सरकार तक अपनी बात पहुँचाना और दबाव बनाना है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया और सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो आने वाले समय में यह आंदोलन और भी तेज और व्यापक हो सकता है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- विरोध का कारण: 69000 शिक्षक भर्ती में कथित आरक्षण घोटाला।
- निशाना: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य का आवास।
- मौजूदा स्थिति: पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को रोका गया, मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित।
- मांग: सरकार द्वारा ठोस पहल और जल्द नियुक्ति।


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