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यूपी के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत दिव्यांग शिक्षकों के दिव्यांगता प्रमाण पत्रों की होगी जांच

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय (प्राथमिक) और माध्यमिक विद्यालयों में तैनात दिव्यांग शिक्षकों के विकलांगता एवं शैक्षिक प्रमाण पत्रों की अब व्यापक और गहन जांच की जाएगी। यह कार्रवाई फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी हासिल करने और दिव्यांग कोटा का गलत लाभ लेने वाले शिक्षकों की पहचान के उद्देश्य से की जा रही है।

उत्तर प्रदेश परिषदीय स्कूलों में दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच

प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर नियुक्ति ली गई। इसी को गंभीरता से लेते हुए उच्च न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। जांच के दौरान दोषी पाए जाने वाले शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी जैसी कठोर कार्रवाई भी की जाएगी।

जांच से जुड़ी प्रमुख बातें

  • जांच का कारण:
    दिव्यांग कोटे का अनुचित लाभ लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की शिकायतें लगातार सामने आ रही थीं।

  • जांच का दायरा:
    परिषदीय (प्राथमिक) और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत सभी दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाएगा।

  • जांच प्रक्रिया:
    निदेशक स्तर के अधिकारियों की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय समिति केस-टू-केस आधार पर प्रमाण पत्रों की बारीकी से जांच करेगी।

  • कार्रवाई:
    जांच में अपात्र पाए जाने या प्रमाण पत्र फर्जी सिद्ध होने पर संबंधित शिक्षक की सेवा समाप्त कर दी जाएगी।

  • पृष्ठभूमि:
    बीते दिनों कई जिलों में फर्जी विकलांगता प्रमाण पत्र के आधार पर नियुक्त शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।

सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगता प्रमाण पत्रों के दुरुपयोग पर रोक लगाना और योग्य अभ्यर्थियों को उनका वास्तविक अधिकार दिलाना है। इससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सकेगी।

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