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मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

Sir Ji Ki Pathshala

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों के मध्य सत्र में किए जा रहे स्थानांतरण और समायोजन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस मामले में बेसिक शिक्षा परिषद और उत्तर प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप सहित 38 शिक्षकों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक

कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि जवाब दाखिल होने तक किसी भी शिक्षक के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। इससे प्रभावित शिक्षकों को अस्थायी राहत मिली है।

याचिका में क्या है आपत्ति

याचिका के अनुसार, याची चित्रकूट जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाध्यापक और सहायक अध्यापक हैं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसे विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहाँ या तो कोई शिक्षक नहीं है या विद्यालय पहले ही बंद हो चुके हैं।

मध्य सत्र में शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट सख्त

याचियों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र अप्रैल से प्रारंभ होता है, ऐसे में मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं बनता। यह प्रक्रिया उत्तर प्रदेश आरटीई अधिनियम 2011 के नियम 21 का स्पष्ट उल्लंघन है।

शीघ्र पदस्थापन की मांग

शिक्षकों ने कोर्ट से मांग की है कि उन्हें शीघ्र उनके मूल अथवा उपयुक्त विद्यालयों में पदस्थ किया जाए, ताकि शिक्षण कार्य बाधित न हो और छात्रों के हित प्रभावित न हों।

आगे की कार्रवाई

अब एक सप्ताह के भीतर सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से दिए जाने वाले जवाब के बाद कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा। इस निर्णय पर प्रदेशभर के शिक्षकों की निगाहें टिकी हुई हैं।