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सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लागू हुआ ‘पिलर फ्रेमवर्क’, पांच चरणों में होगा प्रभावी क्रियान्वयन

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता को नई दिशा देने के उद्देश्य से शिक्षा विभाग द्वारा ‘पिलर फ्रेमवर्क’ को लागू किया गया है। यह फ्रेमवर्क शिक्षकों, शिक्षा अधिकारियों और स्कूलों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए पढ़ाई की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने पर केंद्रित है।


Pillar Framework


यह व्यवस्था स्कूलों की जमीनी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है, ताकि योजनाएं केवल कागजों तक सीमित न रहें, बल्कि कक्षा तक प्रभावी रूप से पहुँच सकें।


क्या है पिलर फ्रेमवर्क?

पिलर फ्रेमवर्क एक व्यावहारिक और चरणबद्ध मॉडल है, जिसके माध्यम से स्कूलों की वास्तविक स्थिति का आकलन कर समस्याओं का समाधान किया जाएगा। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के सीखने के स्तर में सुधार, शिक्षकों को सहयोग और शिक्षा प्रणाली को अधिक जवाबदेह बनाना है।


पिलर फ्रेमवर्क के पांच चरण

1. प्लान परपोजफुली (उद्देश्यपूर्ण योजना)

इस चरण में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) और एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ARP) मिलकर हर महीने स्कूल भ्रमण की योजना बनाएंगे।

  • कमजोर प्रदर्शन वाले स्कूलों को प्राथमिकता
  • हर दौरे का स्पष्ट उद्देश्य तय
  • समय प्रबंधन के लिए 40-20-40-20 मॉडल का उपयोग

2. इंक्वायरी एंड ऑब्जर्व (जांच और अवलोकन)

इस चरण में कक्षा शिक्षण की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जाएगा।

  • शिक्षकों को दिए गए प्रशिक्षण का कक्षा में प्रभाव
  • TLM (शिक्षण सहायक सामग्री) और ICT के उपयोग की समीक्षा
  • बच्चों की सीखने की स्थिति पर विशेष ध्यान

3. लिसन एंड लर्न (सुनना और सीखना)

इस चरण में शिक्षकों से संवाद को प्राथमिकता दी जाएगी।

  • शिक्षकों की समस्याएं, अनुभव और सुझाव सुने जाएंगे
  • चर्चा के माध्यम से समस्याओं की जड़ तक पहुंचने का प्रयास

4. लीड एक्शन (तत्काल कार्रवाई)

जहां संभव होगा, समस्याओं का तुरंत समाधान किया जाएगा।

  • स्कूल, संकुल और BEO स्तर पर समाधान
  • बड़ी समस्याओं को राज्य स्तर तक भेजा जाएगा

5. एनालाइज एंड ट्रैक प्रोग्रेस (विश्लेषण और प्रगति की निगरानी)

इस चरण में किए गए प्रयासों की समीक्षा होगी।

  • सुधार की प्रगति का विश्लेषण
  • अंत में रिफ्लेक्ट एंड रीप्लान के तहत आत्ममंथन कर आगे की रणनीति तैयार

शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आधार

अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलों में पिलर फ्रेमवर्क के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए हैं। उनका मानना है कि इससे:

  • सरकारी स्कूलों की पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर होगी
  • बच्चों की सीखने की क्षमता में वृद्धि होगी
  • शिक्षा व्यवस्था अधिक मजबूत, पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी

‘पिलर फ्रेमवर्क’ सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह न केवल शिक्षकों को सहयोग देगा, बल्कि बच्चों को बेहतर सीखने का माहौल भी प्रदान करेगा। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक और स्थायी बदलाव देखने को मिल सकता है।