लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसा शिक्षकों पर निगरानी कड़ी करने के निर्देश जारी किए हैं। विशेष रूप से अनुदानित मदरसों में कार्यरत शिक्षकों की मासिक उपस्थिति की जांच के बाद ही वेतन जारी किया जाएगा। यह कदम हाल ही में सामने आए संदिग्ध मदरसा शिक्षक शमशुल हुदा के मामले के बाद उठाया गया है, जिसके अंतरराष्ट्रीय संबंधों की जांच चल रही है।

🔎 संदिग्ध शिक्षक पर एटीएस की जांच
एटीएस की रिपोर्ट में पाया गया कि शमशुल हुदा नामक मदरसा शिक्षक:
- 2007 से ब्रिटेन में रह रहा था
- 2013 में ब्रिटिश नागरिकता हासिल कर चुका था
- इसके बावजूद उसने उप्र में अपनी नौकरी पर वेतन और पेंशन का लाभ लिया
उसकी सेवा पुस्तिका की उचित जांच किए बगैर, 2007 से 2017 तक वेतन वृद्धि दी गई और स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के साथ पेंशन भी स्वीकृत कर दी गई।
🏫 प्रदेश में 561 अनुदानित मदरसे
उत्तर प्रदेश में कुल 561 मदरसे हैं जिन्हें सरकार से अनुदान मिलता है। इन मदरसों में:
- कुल 9,889 शिक्षक और
- 8,367 शिक्षणेतर कर्मचारी कार्यरत हैं
- 231,806 छात्र पंजीकृत हैं
🛑 "अब बिना उपस्थिति प्रमाणपत्र के वेतन नहीं"
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है:
- हर माह मदरसा प्रबंधन से उपस्थिति प्रमाणपत्र लेने के बाद ही भुगतान किया जाए
- अधिकारियों द्वारा औचक निरीक्षण भी किए जाएंगे
- विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शिक्षक नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर उपस्थित हों
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया:
“शिक्षकों की उपस्थिति चेक करने के नियम पहले से थे, लेकिन अब शासन स्तर पर इसे लेकर कठोरता से अनुपालन होगा।”
⚠️ अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ीं
एटीएस की रिपोर्ट के बाद, इस मामले में कई अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। विभाग यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि ऐसी घटनाएँ भविष्य में न हों।
🧭 निष्कर्ष
शमशुल हुदा के मामले ने मदरसा प्रबंधन और शासन दोनों के सामने पारदर्शी और सख्त व्यवस्था की आवश्यकता को उजागर किया है। अब सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम मदरसा प्रणाली में जवाबदेही और अनुशासन स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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