30 लाख में सिर्फ 90 हजार कर्मचारियों ने चुना यूपीएस, कारण NPS के मुकाबले UPS में रिटर्न कम
क्यों नहीं आकर्षित कर पा रही यूपीएस?
यूपीएस से कर्मचारियों की दूरी के पीछे तीन बड़ी वजह सामने आई हैं-
1. एनपीएस में ज्यादा अंशदान, फंड
- एनपीएस में कर्मचारी अपनी सैलरी का 10% अंशदान करते हैं और सरकार 14% जोड़ती है। यानी हर महीने कुल 24% राशि फंड में जमा होती है।
- यूपीएस में भी कर्मचारी का अंशदान 10% ही है, पर सरकार यहां सिर्फ 10% देती है। इस तरह फंड में हर महीने 20% ही जमा होता है। सरकार का अतिरिक्त 8.5% हिस्सा सीधे फंड में न जाकर अलग पूल में जाता है, जो रिटायरमेंट पर पेंशन कम होने की स्थिति में इस्तेमाल होगा।
2. यूपीएस में कम रिटर्न
- एनपीएस में रिटर्न औसतन 11.5% है।
- यूपीएस में घटकर 9.5% रह जाता है।
3. निवेश की सीमित आजादी
- एनपीएस में कर्मचारी अपने फंड मैनेजर चुन सकते हैं। यूपीएस में जमा राशि का 88% सरकार तय करती है। सिर्फ 12% कर्मचारी अपनी पसंद से लगा सकते हैं।
आसान उदाहरण से समझें....
- यूपीएस में अंतिम वेतन 1 लाख रुपए/माह है तो पेंशन 50 हजार रुपए / माह हो जाएगी। रिटायरमेंट के बाद मृत्यु हुई तो पत्नी को 30 हजार रु. पेंशन मिलेगी। एनपीएस में पत्नी को उतनी ही पेंशन मिलेगी, जितनी पति को मिल रही थी।
- कर्मचारी की मृत्यु के बाद पत्नी को जमा कॉपर्स फंड (कर्मचारी सरकारी के अंश से जमा होने वाली राशि) से पेंशन दी जाती है। पत्नी की भी मृत्यु होने पर यह फंड सरकार के पास जमा हो जाएगा।
- एनपीएस में पति-पत्नी की मृत्यु के बाद कॉर्पस की राशि आश्रित को मिल जाएगी।


