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बसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण त्योहार को नजरअंदाज करना अनुचित, इससे शिक्षकों का आत्मबल घटने के साथ संस्कृति से दूरी भी बढ़ती है।

Sir Ji Ki Pathshala

बसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण त्योहार को नजरअंदाज करना अनुचित, इससे शिक्षकों का आत्मबल घटने के साथ संस्कृति से दूरी भी बढ़ती है।

उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के अवकाश कैलेंडर में 03 फरवरी को बसंत पंचमी की छुट्टी नहीं घोषित की गई, जिसके कारण शिक्षक संगठनों में असंतोष फैल गया है। आज 03 फरवरी को बसंत पंचमी पड़ रही है। जबकि आज प्रयागराज से सटे सीमावर्ती जिलों में बसंत पंचमी का अवकाश पूर्व में ही घोषित किया जा चुका है। किंतु वाराणसी और प्रयागराज के बीच में स्थित भदोही जनपद में न तो मौनी अमावस्या का अवकाश घोषित किया गया और न ही आज बसंत पंचमी का अवकाश घोषित किया गया।

प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने 03 फरवरी को प्रदेश स्तर पर बसंत पंचमी की छुट्टी घोषित करने के लिए कई प्रयास किए। उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखे, मेल किए और अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन उनके प्रयास विफल रहे। संगठनों का मानना है कि बसंत पंचमी एक महत्वपूर्ण त्योहार है और इसे उचित सम्मान मिलना चाहिए।

बेसिक शिक्षा परिषद का रुख

बेसिक शिक्षा परिषद का कहना है कि कैलेंडर में छुट्टियां पहले से ही निर्धारित की जा चुकी हैं और इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन करना संभव नहीं है। परिषद के अधिकारियों का कहना है कि वे अवकाश कैलेंडर को लेकर विचार कर रहे हैं, लेकिन इसे संशोधित करने का निर्णय एक लंबी प्रक्रिया है।

शिक्षक समुदाय की प्रतिक्रिया

शिक्षक समुदाय में इस निर्णय को लेकर नाराजगी है। उनका मानना है कि बसंत पंचमी जैसे महत्वपूर्ण त्योहार को नजरअंदाज करना अनुचित है। शिक्षकों का कहना है कि इस तरह के त्योहारों पर छुट्टी नहीं होने से उनका आत्मबल घटता है और उनकी संस्कृति से दूरी बढ़ती है।