लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा एवं विधानसभा सचिवालय से संबंधित विषयों को लेकर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक, असत्य एवं अनर्गल सामग्री पोस्ट किए जाने के मामले में विधानसभा सचिवालय ने सख्त रुख अपनाया है। प्रमुख सचिव प्रदीप कुमार दुबे ने 21 अगस्त 2026 को इस संबंध में सूचना निदेशक को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
विधानसभा सचिवालय के संज्ञान में आया कि सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर विधानसभा, विधानसभा सचिवालय, उसके अधिकारियों-कर्मचारियों और विधानसभा अध्यक्ष के संबंध में आपत्तिजनक, असत्य तथा निराधार टिप्पणियां और पोस्ट प्रसारित की जा रही हैं। इसी को लेकर प्रमुख सचिव ने सूचना निदेशालय को पत्र भेजकर संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म संचालकों और संबंधित लोगों तक निर्देश पहुंचाने को कहा है।
मामले में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी पोस्ट या सामग्री को तथ्यों के प्रमाणीकरण के बिना अधिकृत या प्रामाणिक नहीं माना जाएगा। ऐसे कंटेंट के संबंध में सुसंगत नियमों और विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऐसी स्थिति में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत एफआईआर भी हो सकती है।
पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर विधानसभा एवं विधानसभा सचिवालय के संबंध में अनर्गल, असत्य एवं निराधार सामग्री पोस्ट की जा रही है। इसके साथ ही विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों और माननीय अध्यक्ष के संदर्भ में भी आपत्तिजनक, अवांछनीय एवं निराधार टिप्पणियां किए जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि विधानसभा एक संवैधानिक संस्था है। इसलिए विधानसभा, उसके अधिकारियों, कर्मचारियों तथा संवैधानिक प्राधिकारियों के संबंध में निराधार एवं असत्य टिप्पणी किया जाना स्वीकार्य नहीं है।
पत्र के माध्यम से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से संबंधित संचालकों एवं अन्य संबंधित लोगों को निर्देशित करने को कहा गया है कि यदि विधानसभा या विधानसभा सचिवालय अथवा विधानसभा के अधिकारियों, कर्मचारियों और माननीय अध्यक्ष के विषय में कोई आपत्तिजनक, असत्य या अनर्गल सामग्री पोस्ट की जाती है, तो उसके विरुद्ध सुसंगत नियमों एवं विधिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाए।
प्रमुख सचिव ने यह भी कहा है कि किसी भी पोस्ट या सामग्री को तथ्यों के प्रमाणीकरण के बिना अधिकृत एवं प्रामाणिक नहीं माना जाएगा। यानी सोशल मीडिया पर किसी भी अपुष्ट सूचना या टिप्पणी को आधिकारिक तथ्य के रूप में प्रस्तुत करने पर कार्रवाई की जा सकती है।


