वाशिंगटन। कैमरे से लैस स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन इनके दुरुपयोग को लेकर स्कूल और कॉलेजों में निजता तथा सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं भी सामने आने लगी हैं। खासकर बिना जानकारी या सहमति के विद्यार्थियों की फोटो और वीडियो रिकॉर्ड किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और रिपोर्टों में मेटा और रे-बैन के स्मार्ट चश्मों का इस्तेमाल स्कूल-कॉलेजों में प्रैंक, बुलिंग और लोगों की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए किए जाने का दावा किया गया है। चश्मे में कैमरा लगा होने के कारण कई बार सामने वाले व्यक्ति को यह पता नहीं चल पाता कि उसकी रिकॉर्डिंग की जा रही है।
प्रैंक और बुलिंग में बढ़ता इस्तेमाल
स्मार्ट चश्मों के जरिए सामान्य रूप से लोगों के बीच रहते हुए रिकॉर्डिंग की जा सकती है। यही वजह है कि इनके गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ी है। कुछ मामलों में विद्यार्थियों द्वारा दूसरे छात्रों की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर साझा करने जैसे मामलों का भी उल्लेख सामने आया है।
छात्राओं की निजता को लेकर चिंता
कैमरा लगे चश्मों के दुरुपयोग से छात्राओं की निजता और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। बिना अनुमति किसी की तस्वीर या वीडियो बनाना न केवल असहज स्थिति पैदा कर सकता है, बल्कि रिकॉर्डिंग के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने से समस्या और गंभीर हो सकती है।
स्कूलों में डिजिटल सुरक्षा पर जोर जरूरी
तकनीक का सही इस्तेमाल शिक्षा और रोजमर्रा के कामों में उपयोगी साबित हो सकता है, लेकिन इसके साथ डिजिटल प्राइवेसी के नियमों को समझना भी जरूरी है। स्कूलों और कॉलेजों में विद्यार्थियों को बिना अनुमति फोटो या वीडियो रिकॉर्ड न करने, निजी सामग्री साझा न करने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
विशेषज्ञों के अनुसार स्मार्ट चश्मों जैसी नई तकनीक के इस्तेमाल के साथ स्पष्ट नियम और जिम्मेदार व्यवहार जरूरी हैं, ताकि तकनीकी सुविधा किसी की निजता और सुरक्षा के लिए खतरा न बने।


