लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में हुए बदलावों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में नई शिक्षा व्यवस्था नकलमुक्त और अकल से युक्त है। उन्होंने कहा कि सरकार ने परीक्षा व्यवस्था को समयबद्ध और पारदर्शी बनाने के साथ-साथ विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में परीक्षाएं निर्धारित समय पर आयोजित हो रही हैं और विद्यार्थियों को परीक्षा परिणाम के लिए महीनों तक इंतजार नहीं करना पड़ता। उन्होंने पूर्व की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2017 से पहले परीक्षा, परिणाम और अवकाश की प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था। विद्यार्थियों को परीक्षा के लिए कई महीनों तक इंतजार करना पड़ता था और परिणाम आने में भी लंबा समय लगता था।
उन्होंने बताया कि वर्तमान व्यवस्था में परीक्षा प्रक्रिया को काफी तेज किया गया है। परीक्षा समाप्त होने के लगभग 14 दिन के भीतर परीक्षा संबंधी प्रक्रिया पूरी करने और उसके अगले करीब 14 से 15 दिनों में परिणाम जारी करने की दिशा में व्यवस्था विकसित की गई है। इससे विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समय पर अवसर मिल रहा है।
जर्जर विद्यालय भवनों के सुधार पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया के माध्यम से जर्जर विद्यालय भवनों की तस्वीरें और जानकारी सामने लाने वाले लोगों का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि ऐसे विद्यालयों की स्थिति सरकार के संज्ञान में लाना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जो लोग जर्जर स्कूल भवनों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, वे सरकार के लिए एक तरह से स्मारक का काम कर रहे हैं, जिससे संबंधित विद्यालयों की स्थिति पर ध्यान दिया जा सके।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश सरकार माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से पुराने और जर्जर विद्यालय भवनों के सुधार पर काम कर रही है। इसका उद्देश्य विद्यालयों में विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को सुरक्षित भवन, बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण वातावरण उपलब्ध कराना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
रसोइयों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना की शुरुआत
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत रसोइयों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों की भूमिका महत्वपूर्ण है और सरकार उनके कल्याण को लेकर लगातार कदम उठा रही है।
मुख्यमंत्री ने कोरोना महामारी के दौरान रसोइयों द्वारा किए गए योगदान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भी रसोइयों ने अपनी जिम्मेदारी निभाई और बच्चों तक आवश्यक सेवाएं पहुंचाने में योगदान दिया।
सरकार की ओर से रसोइयों को अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री ने बताया कि रसोइयों को दो यूनिफॉर्म के साथ बैग, किताबें, जूते-मोजे और स्वेटर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
कंपोजिट विद्यालय मॉडल पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में विद्यालयों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए कंपोजिट विद्यालय मॉडल को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के अंत तक कंपोजिट विद्यालय मॉडल को शुरू किए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इस मॉडल के माध्यम से विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने और विद्यार्थियों को एक ही परिसर में अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
कोरोना से प्रभावित बच्चों के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के दौरान निराश्रित हुए बच्चों के लिए संचालित मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण जिन बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया या जो कठिन परिस्थितियों में आए, उनकी शिक्षा और भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने सहायता उपलब्ध कराई है।
ऐसे बच्चों की पढ़ाई के लिए सरकार की ओर से चार हजार रुपये की छात्रवृत्ति दिए जाने की जानकारी मुख्यमंत्री ने दी। सरकार का उद्देश्य यह है कि आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी बच्चे की पढ़ाई बाधित न हो।
बाल वाटिका के संचालन के लिए विशेष शिक्षकों की तैनाती
मुख्यमंत्री ने विद्यालयों के पुनर्गठन और विलय के बाद बाल वाटिका के संचालन की व्यवस्था पर भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बाल वाटिका के संचालन के लिए 10 हजार स्पेशल एजुकेटर्स तैनात किए गए हैं।
बाल वाटिका के माध्यम से छोटे बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर सीखने के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने और उन्हें आगे की औपचारिक शिक्षा के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षा व्यवस्था में बदलाव को बताया महत्वपूर्ण उपलब्धि
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में पिछले वर्षों के दौरान व्यापक बदलाव किए गए हैं। परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समयबद्ध परिणाम, विद्यालय भवनों के सुधार, शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों से जुड़ी सुविधाओं और विद्यार्थियों के हित में संचालित योजनाओं को उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं का हिस्सा बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ऐसी शिक्षा व्यवस्था तैयार करना है जिसमें विद्यार्थी बिना किसी दबाव के पढ़ाई कर सकें और उन्हें समय पर परीक्षा, परिणाम तथा आगे की शिक्षा के अवसर मिल सकें।
कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, विधायक नीरज बोरा, विधान परिषद सदस्य अवनीश कुमार सिंह और रामचंद्र प्रधान सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी मौजूद रहे।
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री के संबोधन में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, समयबद्ध और विद्यार्थी-केंद्रित बनाने के साथ-साथ विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और रसोइयों जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी कर्मचारियों के कल्याण पर सरकार के फोकस को रेखांकित किया गया।


