प्रयागराज। उत्तर प्रदेश की 15000 शिक्षक भर्ती में चयनित शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि को लेकर लंबे समय से चली आ रही विसंगति के मामले में बड़ी खबर सामने आई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षकों की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए जनवरी 2017 से वेतन वृद्धि दिए जाने के पक्ष में फैसला सुनाया है।
मामला वर्ष 2016 में नियुक्त हुए उन शिक्षकों की पहली वार्षिक वेतन वृद्धि से जुड़ा है, जिन्होंने 1 जुलाई 2016 को कार्यभार ग्रहण करना था। लेकिन 1 जुलाई को सार्वजनिक अवकाश होने के कारण अधिकांश शिक्षकों ने अगले कार्यदिवस यानी 2 जुलाई 2016 को विद्यालय में कार्यभार ग्रहण किया।
इसके बाद विभाग की ओर से उनकी पहली वार्षिक वेतन वृद्धि जुलाई 2017 से निर्धारित की गई। शिक्षकों का कहना था कि 1 जुलाई को अवकाश होने के कारण 2 जुलाई को किया गया कार्यभार ग्रहण 1 जुलाई के समान माना जाना चाहिए। ऐसे में उन्हें जनवरी 2017 से ही पहली वेतन वृद्धि का लाभ मिलना चाहिए था।
इस संबंध में शिक्षक संगठनों और प्रभावित शिक्षकों की ओर से लंबे समय से विभागीय स्तर पर भी मांग उठाई जाती रही है। पूर्व में कई जिलों में बीएसए एवं संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर वेतन वृद्धि की विसंगति दूर करने की मांग की गई थी।
जनवरी 2017 से मिलेगा इन्क्रीमेंट?
उपलब्ध अपडेट के अनुसार हाईकोर्ट के निर्णय के बाद पात्र शिक्षकों को जनवरी 2017 से वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ दिए जाने का रास्ता साफ हो सकता है। इसका सीधा असर संबंधित शिक्षकों के वर्तमान वेतन निर्धारण पर पड़ेगा और पात्रता के अनुसार पूर्व अवधि का एरियर भी बन सकता है।
हालांकि, वास्तविक भुगतान और एरियर की प्रक्रिया कोर्ट के विस्तृत आदेश तथा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी होने वाले अनुपालन आदेश पर निर्भर करेगी। इसलिए शिक्षकों को अंतिम लाभ मिलने के लिए विभागीय आदेश का इंतजार करना होगा।
15000 शिक्षक भर्ती के शिक्षकों के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जुलाई 2017 की जगह जनवरी 2017 से इन्क्रीमेंट मिलने पर उनके वेतन का पुनर्निर्धारण हो सकता है और इसका प्रभाव आगे की वेतन वृद्धि पर भी पड़ सकता है।
नोट: हाईकोर्ट के विस्तृत निर्णय और विभागीय अनुपालन आदेश के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि आदेश किन शिक्षकों पर और किस प्रक्रिया के तहत लागू होगा।


