Type Here to Get Search Results !

यूपी के सरकारी स्कूलों में 30 जून तक दूर होगी शिक्षकों की कमी, 18 जून से ऑनलाइन आवेदन

Sir Ji Ki Pathshala

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने और छात्र-शिक्षक अनुपात को दुरुस्त करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 'सरप्लस' (आवश्यकता से अधिक) शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। विभाग ने इस पूरी कवायद को 30 जून 2026 तक पूरा करने का कड़ा लक्ष्य रखा है, ताकि जुलाई से शुरू होने वाले नए शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई पर कोई आंच न आए।

UP Govt School Teachers Adjustment and Transfer Process 2026

​क्या है विभाग की योजना और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

​माध्यमिक शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सूबे के कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहाँ छात्रों की संख्या के मुकाबले शिक्षकों की तादाद बहुत ज्यादा है, जबकि कई स्कूल ऐसे भी हैं जो शिक्षकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। इस विसंगति को दूर करने के लिए विभाग 'सरप्लस' शिक्षकों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षक विहीन या कम शिक्षकों वाले स्कूलों में तैनात कर रहा है। कई जिलों ने अपने यहाँ के सरप्लस शिक्षकों की सूची भी सार्वजनिक कर दी है और रिक्त पदों के हिसाब से उनकी नई तैनाती की रूपरेखा तैयार कर ली गई है।

​शिक्षण कार्य के लिए तय हुए नए कड़े मानक

​इस बार केवल तबादले ही नहीं किए जा रहे हैं, बल्कि शिक्षकों के काम के घंटे और जिम्मेदारी भी तय की गई है। विभाग द्वारा जारी स्पष्ट दिशा-निर्देशों के मुताबिक:

  • अनिवार्य पीरियड: राजकीय इंटर कॉलेजों (GIC) में विज्ञान, वाणिज्य (कॉमर्स) और अन्य विषयों के प्रवक्ताओं (Lecturers) के लिए अब प्रतिदिन कम से कम 5 पीरियड पढ़ाना अनिवार्य होगा।
  • जूनियर कक्षाओं में भी पढ़ाना होगा: यदि इंटरमीडिएट (कक्षा 11 और 12) स्तर पर किसी विषय में छात्रों की संख्या मानक से कम है, तो उस शिक्षक को खाली नहीं बैठने दिया जाएगा। संबंधित शिक्षक के कार्यभार को पूरा करने के लिए उन्हें कक्षा 6 से 10 या कक्षा 9 व 10 की कक्षाओं में भी पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

​इन जिलों में हैं सबसे ज्यादा सरप्लस शिक्षक; कहीं-कहीं सुगबुगाहट भी

​विभागीय आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तर प्रदेश के कई जिलों में सरप्लस शिक्षकों का आंकड़ा काफी बड़ा है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

प्रमुख प्रभावित जिले: प्रतापगढ़, झांसी, सोनभद्र, संभल, मैनपुरी, गोंडा, महोबा, कानपुर नगर, जालौन, ललितपुर, आगरा, एटा, महराजगंज, गाजीपुर और सहारनपुर।

​जहाँ एक तरफ कुछ जिलों ने अपनी सूचियां जारी कर दी हैं, वहीं कुछ जिलों में अभी यह काम कछुआ गति से चल रहा है। इस बीच, विभाग के इस फैसले को लेकर शिक्षकों के एक गुट में असंतोष भी पनप रहा है। कुछ शिक्षकों का तर्क है कि केवल छात्र संख्या कम होने के आधार पर उन्हें 'सरप्लस' घोषित कर देना न्यायसंगत नहीं है।

​18 जून से शुरू होंगे ऑनलाइन आवेदन

​प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त रखने के लिए विभाग ने डिजिटल रास्ता चुना है। आगामी 18 जून से जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन की खिड़की खोल दी जाएगी। शिक्षक अपनी चॉइस और विभाग की रिक्तियों के आधार पर आवेदन कर सकेंगे, जिसके बाद तय मानकों के तहत उनका समायोजन किया जाएगा।

​नए सत्र से दिखेगा बड़ा बदलाव

​माध्यमिक शिक्षा विभाग को पूरी उम्मीद है कि 30 जून तक इस अभियान के मुकम्मल होने के बाद प्रदेश के राजकीय विद्यालयों की सूरत बदलेगी। जुलाई में जब छात्र नए सत्र के लिए स्कूलों में कदम रखेंगे, तो उन्हें हर विषय के लिए पर्याप्त शिक्षक मिलेंगे। सरकार का मुख्य फोकस ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों के स्कूलों पर है, जहाँ अक्सर शिक्षकों की कमी के चलते पढ़ाई प्रभावित होती थी। इस कदम से न सिर्फ सरकारी स्कूलों के परीक्षा परिणामों में सुधार होगा, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी बेहतर होगी।