झांसी। उत्तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के खिलाफ चल रही शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति के तहत एक और बड़ा मामला सामने आया है। झांसी के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) विपुल शिवसागर के खिलाफ विजिलेंस (सतर्कता अधिष्ठान) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। उनके कार्यकाल के दौरान हुए शिक्षकों के समायोजन, नई नियुक्तियों और मनमाने विद्यालय आवंटन में गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। शिकायत दर्ज होने के बाद जिला प्रशासन ने भी संबंधित फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया है।
महानगर के नवाबाद क्षेत्र के एक स्थानीय समाजसेवी और सजग नागरिक द्वारा तत्कालीन बीएसए विपुल शिवसागर के खिलाफ विजिलेंस मुख्यालय में एक विस्तृत शिकायती पत्र भेजा गया था। इस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अफसर ने अपने कार्यकाल के दौरान शासकीय नियमों को ताक पर रखकर कई ऐसे फैसले लिए, जिससे न केवल राजस्व को नुकसान पहुंचा, बल्कि योग्य शिक्षकों के अधिकारों का भी हनन हुआ।
शिकायत का संज्ञान लेते हुए विजिलेंस ने प्राथमिक छानबीन के बाद महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) को पत्र लिखकर इस कार्यकाल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे थे। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद अब पूरा मामला जांच के लिए झांसी जिला प्रशासन को ट्रांसफर कर दिया गया है।
जांच के दायरे में शामिल 3 मुख्य बिंदु
विजिलेंस और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच मुख्य रूप से तीन बड़े प्रशासनिक फैसलों के इर्द-गिर्द घूम रही है:
क) समायोजन और मनचाही पोस्टिंग में विसंगतियां
शिकायतकर्ताओं और शिक्षक संगठनों का आरोप है कि जिले के भीतर हुए शिक्षकों के समायोजन (Adjustment) में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गईं। नियमों को दरकिनार कर कुछ 'खास' शिक्षकों को उनकी सुविधा के अनुसार शहरी या सुगम क्षेत्रों के विद्यालय आवंटित कर दिए गए, जबकि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में नियमों का हवाला देकर अन्य शिक्षकों के साथ भेदभाव किया गया।
ख) विशेष एजुकेटर (Special Educator) भर्ती में खेल
मामले में सबसे गंभीर आरोप विशेष एजुकेटरों की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर लगा है।
- मेरिट की अनदेखी: आरोप है कि चयन के दौरान तय मेरिट सूची को प्रभावित किया गया।
- ऑफलाइन काउंसलिंग: नियमानुसार काउंसलिंग और विद्यालय आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी होनी चाहिए थी, लेकिन कथित तौर पर बैकडोर एंट्री (सीधी भर्ती) के जरिए चहेतों को लाभ पहुंचाया गया।
ग) दागी शिक्षकों पर 'मेहरबानी'
अभिलेखों के अनुसार, जिन शिक्षकों पर गंभीर अनुशासनहीनता या भ्रष्टाचार के आरोप थे और जिन्हें दूरस्थ क्षेत्रों में सस्पेंड या ट्रांसफर किया गया था, उन्हें बिना किसी ठोस आधार के दोबारा मलाईदार और सुविधाजनक स्थानों पर बहाल (Reinstate) कर दिया गया।
जिला प्रशासन एक्शन में: एडी बेसिक को सौंपी कमान
विजिलेंस से हरी झंडी मिलने के बाद झांसी जिला प्रशासन ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एडी बेसिक (सहायक शिक्षा निदेशक, बुनियादी) को इस पूरे प्रकरण का मुख्य जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।
प्रशासनिक सूत्र के अनुसार: "तत्कालीन बीएसए के कार्यकाल की सभी फाइलें, ऑनलाइन ट्रांसफर का डेटा, और विशेष एजुकेटर भर्ती से जुड़े मूल दस्तावेजों को कब्जे में लेकर स्क्रूटनी (सत्यापन) की जा रही है। यदि शुरुआती जांच में आरोपों की पुष्टि होती है, तो पूर्व बीएसए के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कर विभागीय दंडात्मक कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।"
शिक्षक संगठनों ने उठाई निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
इस बड़ी जांच की खबर सार्वजनिक होते ही झांसी के शिक्षा जगत में खलबली मच गई है। विभिन्न शिक्षक संगठनों के पदाधिकारियों ने खुलकर इस जांच का स्वागत किया है। संगठनों का कहना है कि लंबे समय से पारदर्शी व्यवस्था की मांग की जा रही थी। अगर इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो भविष्य में कोई भी अधिकारी अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर शिक्षकों का शोषण या भ्रष्टाचार करने की हिम्मत नहीं कर सकेगा।
जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें
फिलहाल, यह पूरा मामला पूरी तरह से जांच के अधीन है और पूर्व बीएसए विपुल शिवसागर पर लगे आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। जांच एजेंसियां पूरी सतर्कता के साथ एक-एक दस्तावेज का मिलान कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि एडी बेसिक द्वारा सौंपी जाने वाली जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य निकलकर सामने आते हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट पर पूर्व बीएसए के भविष्य का फैसला टिका है।



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