Type Here to Get Search Results !

सरकारी कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर! डेथ बेनिफिट और ग्रेच्युटी पर बड़ा अपडेट

Sir Ji Ki Pathshala

8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की सुगबुगाहट के बीच केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण खबर आ रही है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सरकार के सामने ग्रेच्युटी (Gratuity) और डेथ बेनिफिट्स (Death Benefits) के नियमों में बड़े और क्रांतिकारी बदलाव करने की मांग रखी है।

8th pay commission gratuity update

​अगर इन प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है, तो सेवानिवृत्ति (Retirement) के समय कर्मचारियों को मिलने वाले फंड में भारी बढ़ोतरी होगी। आइए इस पूरे मामले को विस्तार से समझते हैं कि आखिर कर्मचारी संगठनों की मांगें क्या हैं और इससे आम कर्मचारी को क्या फायदा होगा।

​8वां वेतन आयोग: ग्रेच्युटी और डेथ बेनिफिट्स पर कर्मचारी संगठनों का बड़ा दांव

​विभिन्न केंद्रीय कर्मचारी यूनियनों और सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसायटियों ने आगामी 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपने प्रस्ताव सौंप दिए हैं। इन प्रस्तावों का मुख्य उद्देश्य बढ़ती महंगाई के दौर में कर्मचारियों और उनके परिवारों को सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना है।

​इन प्रस्तावों में मुख्य रूप से तीन बातें शामिल हैं:

  • ​ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा में रिकॉर्ड बढ़ोतरी।
  • ​ग्रेच्युटी कैल्कुलेशन (गणना) के फॉर्मूले में बदलाव।
  • ​सेवा के दौरान मृत्यु (Death in Service) होने पर आश्रितों को मिलने वाले लाभ का दायरा बढ़ाना।

​वर्तमान व्यवस्था क्या है? (मौजूदा नियम)

​फिलहाल केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक, किसी भी कर्मचारी को ग्रेच्युटी का लाभ लेने के लिए कम से कम 5 साल की नियमित सेवा पूरी करनी होती है।

मौजूदा फॉर्मूला: ग्रेच्युटी की गणना कर्मचारी के अंतिम मूल वेतन (Basic Pay) और महंगाई भत्ते (DA) के आधार पर की जाती है। यह राशि कर्मचारी के कुल वेतन के अधिकतम 16.5 गुना तक ही सीमित हो सकती है, जिसकी अधिकतम सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है।

​कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि मौजूदा वेतन ढांचे और आसमान छूती महंगाई को देखते हुए यह 25 लाख रुपये की सीमा अब बहुत कम है।

​प्रमुख संगठनों की बड़ी मांगें: एक नजर में

​ग्रेच्युटी नियमों को अधिक व्यावहारिक और आकर्षक बनाने के लिए अलग-अलग संगठनों ने सरकार के सामने निम्नलिखित बड़े प्रस्ताव रखे हैं:

​1. नेशनल काउंसिल-JCM: सीधे ₹75 लाख की सीमा और नया फॉर्मूला

​स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद (NC-JCM) ने सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है:

  • ₹75 लाख की सीमा: संगठन ने मांग की है कि ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को सीधे बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया जाए।
  • 25 कार्य दिवसों पर गणना: वर्तमान में ग्रेच्युटी की गणना महीने के 30 दिनों के आधार पर होती है। JCM का सुझाव है कि इसे निजी क्षेत्र की तर्ज पर 25 कार्य दिवसों (Working Days) के आधार पर कैलकुलेट किया जाए, जिससे कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा।
  • 16.5 गुना की कैप हटाना: मौजूदा नियम के तहत 33 वर्ष से अधिक की सेवा देने वाले कर्मचारियों की ग्रेच्युटी एक जगह जाकर रुक जाती है। संगठन चाहता है कि इस सीमा को हटाया जाए ताकि लंबी सर्विस वाले कर्मचारियों को उनकी पूरी सेवा का उचित फल मिले।

​2. IRTSA: ₹50 लाख की सीमा और डेथ ग्रेच्युटी में सुधार

​भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ (IRTSA) ने भी अपनी मांगें मजबूती से रखी हैं:

  • ​संगठन ने ग्रेच्युटी की ऊपरी सीमा को बढ़ाकर 50 लाख रुपये करने का प्रस्ताव दिया है।
  • ​इसके साथ ही, यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि के दौरान असामयिक मृत्यु हो जाती है, तो उसके परिवार को मिलने वाली डेथ ग्रेच्युटी की रकम को सेवा के वर्षों के अनुपात में और अधिक बढ़ाने की वकालत की गई है।

​3. RSCWS: महंगाई के साथ संशोधन और सभी पेंशन योजनाओं में समानता

​रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS) ने एक दूरगामी सुझाव दिया है:

  • महंगाई लिंक्ड ग्रेच्युटी: संगठन का कहना है कि ग्रेच्युटी की सीमा को फ्रीज करने के बजाय समय-समय पर महंगाई के अनुपात में स्वतः (Automatically) संशोधित किया जाना चाहिए।
  • पेंशन योजनाओं में समानता: पुरानी पेंशन योजना (OPS), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) और नई यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) के तहत मिलने वाले ग्रेच्युटी नियमों में पूरी समानता होनी चाहिए ताकि किसी भी कर्मचारी के साथ भेदभाव न हो।

​कर्मचारियों पर क्या होगा इसका असर?

​यदि 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों में इन प्रस्तावों को जगह मिलती है और सरकार इन्हें स्वीकार करती है, तो इसके दूरगामी परिणाम होंगे:

  • पेंशनर्स को बड़ी राहत: रिटायरमेंट के वक्त एकमुश्त (Lump-sum) मिलने वाली राशि लगभग दोगुनी या तीन गुनी तक बढ़ सकती है, जिससे बुढ़ापे को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी।
  • सुरक्षित परिवार: नौकरी के दौरान मृत्यु की स्थिति में पीड़ित परिवार को मिलने वाली वित्तीय सहायता मजबूत होगी, जिससे उन्हें अचानक आए संकट से जूझने की ताकत मिलेगी।
  • लंबे कार्यकाल का सम्मान: 33 साल से ज्यादा देश की सेवा करने वाले कर्मचारियों को उनके अतिरिक्त सालों का भी पूरा वित्तीय लाभ मिल सकेगा।

​फिलहाल ये सभी प्रस्ताव शुरुआती चरण में हैं और कर्मचारी संगठनों द्वारा दबाव बनाया जा रहा है। अब देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और राज्य कर्मचारियों की नजरें भी 8वें वेतन आयोग के अंतिम रुख और सरकार के फैसले पर टिकी हैं।