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यूपी में अब 'एक जिला-एक व्यंजन' का जलवा: योगी सरकार की नई पहल, स्थानीय जायके को मिलेगी वैश्विक ब्रांडिंग

Sir Ji Ki Pathshala

UP One District One Cuisine Scheme: यूपी के हर जिले का स्वाद अब ग्लोबल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और खान-पान की विरासत को आर्थिक ताकत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। 'एक जिला-एक उत्पाद' (ODOP) की सफलता के बाद अब राज्य में 'एक जिला-एक व्यंजन' (One District-One Cuisine - ODOC) योजना को लागू करने की आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है।

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​कैबिनेट की हालिया बैठक में सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्यम (MSME) विभाग के इस प्रस्ताव को हरी झंडी मिली, जिसका उद्देश्य यूपी के पारंपरिक स्वादों को न केवल देश में बल्कि सात समंदर पार पहचान दिलाना है।

योजना का मुख्य उद्देश्य और बजट

​प्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान के अनुसार, इस योजना के लिए ₹150 करोड़ का प्रारंभिक बजट निर्धारित किया गया है। योजना का मूल मंत्र स्थानीय कारीगरों, हलवाइयों और खाद्य उद्यमियों को सशक्त बनाना है।

योजना की प्रमुख विशेषताएं:

  • वित्तीय सहायता: खाद्य प्रसंस्करण और विनिर्माण से जुड़े उद्यमियों को 25% तक की सब्सिडी दी जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा ₹20 लाख निर्धारित की गई है।
  • तकनीकी विकास: व्यंजनों की शेल्फ लाइफ (खराब न होने की अवधि) बढ़ाने के लिए आधुनिक लैब और पैकेजिंग तकनीक का सहारा लिया जाएगा।
  • ग्लोबल ब्रांडिंग: आगरा के पेठे से लेकर जौनपुर की इमरती तक, हर उत्पाद की अंतरराष्ट्रीय मानकों पर पैकेजिंग और मार्केटिंग की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के व्यंजनों का मंडलवार खाका (ODOC List)

​सरकार ने प्रदेश के सभी मंडलों के खास व्यंजनों को चिह्नित किया है। यहाँ विस्तार से देखें किस क्षेत्र की कौन सी डिश इस योजना का हिस्सा है:

1. पश्चिम और मध्य यूपी का स्वाद

  • आगरा मंडल: यहाँ का विश्वप्रसिद्ध पेठा, दालमोठ, गजक, पेड़ा, आलू टिक्की और सोहन पापड़ी मुख्य आकर्षण हैं।
  • अलीगढ़ मंडल: डेयरी उत्पादों के साथ-साथ कचौड़ी, चमचम और मलाईदार रबड़ी।
  • कानपुर मंडल: कानपुर के प्रसिद्ध समोसे और मलाई मक्खन, कन्नौज का खोया पेड़ा और औरैया की देसी घी वाली बर्फी

2. पूर्वांचल और अवध का जायका

  • वाराणसी मंडल: बनारसी पान, तिरंगा बर्फी, लौंग लता, मलइयो और जौनपुर की मशहूर इमरती
  • लखनऊ मंडल: राजधानी की प्रसिद्ध मक्खन मलाई, रेवड़ी और चाट। साथ ही उन्नाव का काला जामुन, सीतापुर का मिर्ची पकोड़ा और रायबरेली के मसाले।
  • अयोध्या मंडल: रामनगरी की कुल्हड़ वाली दही-जलेबी, बाराबंकी की चन्द्रकला मिठाई, अमेठी का समोसा और पारंपरिक गुड़ की खीर।
  • गोरखपुर मंडल: यहाँ का लिट्टी-चोखा, देवरिया का मालपुआ और महाराजगंज का औषधीय गुणों वाला गुड़।

3. तराई और बुंदेलखंड का तड़का

  • देवीपाटन मंडल: गोंडा के दही बड़े व कचौड़ी, बहराइच का चमचम और बलरामपुर की नारियल बर्फी।
  • चित्रकूट मंडल: बांदा का प्रसिद्ध सोहन हलवा और बालूशाही।
  • बस्ती मंडल: यहाँ का पारंपरिक ठेकुआ, पूड़ी-सब्जी और संतकबीरनगर की खोया मिठाई।

4. अन्य प्रमुख मंडल

  • प्रयागराज मंडल: संगम नगरी की कचौड़ी-सब्जी, प्रतापगढ़ के आंवला उत्पाद और कौशाम्बी की गुड़ चिक्की।
  • आजमगढ़ मंडल: यहाँ की मूंग दाल की तहरी और विशेष सफेद गाजर।
  • बरेली मंडल: बरेली की मशहूर सेवइयां, बर्फी और चटपटे छोले-भटूरे।

रोजगार और निर्यात के नए अवसर

​ODOC योजना सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का एक जरिया है।

  1. निर्यात क्षमता: कई मिठाइयां और स्नैक्स ऐसे हैं जिनकी विदेशों में भारी मांग है, लेकिन सही पैकेजिंग न होने के कारण वे निर्यात नहीं हो पाते। यह योजना उस कमी को पूरा करेगी।
  2. पर्यटन को बढ़ावा: 'फूड टूरिज्म' के माध्यम से विदेशी पर्यटकों को यूपी के अलग-अलग जिलों के विशिष्ट स्वादों की ओर आकर्षित किया जाएगा।
  3. कौशल विकास: स्थानीय रसोइयों और कारीगरों को स्वच्छता (Hygiene) और गुणवत्ता नियंत्रण के आधुनिक मानकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

निष्कर्ष

​योगी सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को 'फूड बास्केट ऑफ इंडिया' बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। आगरा के पेठे की महक हो या बनारस के पान की मिठास, अब यूपी का हर जिला अपनी एक अलग पहचान के साथ ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाएगा।

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