प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए प्रदेश सरकार ने एक अभिनव प्रयोग शुरू किया है। अब लोक सेवा आयोग (UPPSC) के माध्यम से नियमित शिक्षकों की भर्ती होने तक, सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक 'अतिथि' के रूप में छात्रों का भविष्य संवारेंगे। विशेष बात यह है कि यह सेवा पूरी तरह से नि:शुल्क और स्वैच्छिक होगी।
मिशन 'अनुभव का लाभ'
प्रदेश के 2,635 राजकीय विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों के कारण पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने विस्तृत योजना तैयार की है। मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देशानुसार, अब जनपदवार और विकासखंडवार ऐसे सेवानिवृत्त कार्मिकों की सूची तैयार की जा रही है जो अपनी विशेषज्ञता के आधार पर शिक्षण कार्य में योगदान देना चाहते हैं।
चयन प्रक्रिया और पात्रता
अतिथि शिक्षकों के चयन और निगरानी के लिए शासन ने पारदर्शी व्यवस्था बनाई है:
- चयन समिति: जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की अध्यक्षता में एक विशेष समिति का गठन किया जाएगा।
- आयु सीमा: पढ़ाने के इच्छुक विशेषज्ञों की अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गई है।
- आवेदन प्रक्रिया: इच्छुक व्यक्ति अपनी पसंद के स्कूल (जहाँ पद रिक्त हो) की जानकारी सीधे DIOS को ईमेल के माध्यम से दे सकते हैं।
हाइब्रिड मॉडल: ऑनलाइन और ऑफलाइन का संगम
सिर्फ भौतिक उपस्थिति ही नहीं, बल्कि तकनीक के माध्यम से भी शिक्षा को सुदृढ़ किया जाएगा। शासन ने समेकित मॉडल (Integrated Model) लागू करने के निर्देश दिए हैं:
- स्मार्ट क्लास: विशेषज्ञ शिक्षकों के ऑनलाइन वीडियो व्याख्यान डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराए जाएंगे।
- ऑफलाइन कक्षाएं: अतिथि शिक्षक विद्यालयों में उपस्थित होकर पारंपरिक तरीके से पढ़ाएंगे।
शिक्षा जगत में नई उम्मीद
इस पहल से न केवल शिक्षकों की कमी दूर होगी, बल्कि छात्रों को प्रशासन और शिक्षा जगत के अनुभवी अधिकारियों का मार्गदर्शन भी मिलेगा। यह उन सेवानिवृत्त लोगों के लिए भी एक बेहतरीन मंच है जो समाज को वापस कुछ देना (Give Back to Society) चाहते हैं।
मुख्य बिंदु एक नज़र में:
- कुल विद्यालय: 2,635 राजकीय माध्यमिक स्कूल।
- आधार: पूर्णतः नि:शुल्क और स्वैच्छिक सेवा।
- लक्ष्य: नियमित भर्ती होने तक वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करना।


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