लखनऊ: भारत की आगामी 'जनगणना 2027' को अधिक सटीक और आधुनिक बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र (एस.पी. गोयल के पत्रानुसार) ने प्रदेश के सभी शीर्ष अधिकारियों और जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं कि जनगणना के प्रथम चरण में आम जनता को 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) के प्रति जागरूक और प्रोत्साहित किया जाए।
मकान सूचीकरण का कार्यक्रम
जनगणना 2027 का प्रथम चरण, जिसे मकान सूचीकरण एवं मकान गणना (House Listing Operations-HLO) कहा जाता है, उत्तर प्रदेश में 22 मई, 2026 से 20 जून, 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस कार्य के औपचारिक रूप से शुरू होने से पहले आम नागरिकों के लिए 15 दिनों की एक विशेष अवधि निर्धारित की गई है, जिसमें वे स्वयं अपनी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे।
क्या है 'स्व-गणना' (Self-Enumeration)?
यह एक ऐसी आधुनिक सुविधा है जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं जनगणना पोर्टल (https://se.census.gov.in) पर जाकर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
- सटीक डेटा: स्वयं द्वारा जानकारी देने से त्रुटियों की संभावना कम होती है।
- समय की बचत: प्रगणकों (Enumerators) द्वारा घर-घर आने पर लगने वाले समय में कमी आती है।
- सुविधाजनक: नागरिक अपनी सुविधानुसार किसी भी समय पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं।
सरकार की विशेष रणनीति
प्रशासन ने इस अभियान को सफल बनाने के लिए बहुआयामी रणनीति तैयार की है:
- विशिष्ट व्यक्तियों की भागीदारी: हर जिले के प्रख्यात व्यक्तित्वों से अपील की जाएगी कि वे स्वयं गणना कर समाज के लिए उदाहरण पेश करें।
- विषयगत दिवसों का आयोजन: अभियान के दौरान राजस्व दिवस, स्थानीय निकाय दिवस, युवा एवं खेल दिवस, और महिला/स्वयं सहायता समूह दिवस जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
- असिस्टेड एन्युमरेशन: जो लोग तकनीक से परिचित नहीं हैं, उनके लिए ग्राम और नगर स्तर पर हेल्प डेस्क, कियोस्क और डिजिटल सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाएगी।
- सोशल मीडिया कैंपेन: सोशल मीडिया पर जागरूकता फैलाने के लिए #seup, #censusup, और #census2027 जैसे हैशटैग का उपयोग किया जाएगा।
अधिकारियों को सख्त निर्देश
शासन ने निर्देश दिया है कि सभी सरकारी अधिकारी और कर्मचारी सबसे पहले अपनी स्व-गणना पूर्ण करें और अपने परिवार व परिचितों को भी इसके लिए प्रेरित करें। विभाग स्तर पर 'नोडल अधिकारी' नामित किए जाएंगे जो इस पूरी प्रक्रिया का समन्वय करेंगे।
निष्कर्ष: जनगणना केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह भविष्य की सरकारी योजनाओं और विकास का आधार है। 'स्व-गणना' में भाग लेकर उत्तर प्रदेश के नागरिक न केवल अपनी जिम्मेदारी निभा सकते हैं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की इस डिजिटल प्रक्रिया का हिस्सा भी बन सकते हैं।



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