प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) अब केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि खेल के मैदान पर पसीना बहाने वाले छात्र-छात्राओं की मेहनत को भी सम्मानित करेगा। बोर्ड ने राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को 5 से 20 बोनस अंक देने का एक संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उभरते खिलाड़ियों को शिक्षा के साथ-साथ खेलों में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।
किन खिलाड़ियों को मिलेगा लाभ?
बोर्ड द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के अनुसार, बोनस अंकों का लाभ केवल उन्हीं छात्रों को मिलेगा जो निम्नलिखित मानदंडों को पूरा करते हैं:
- प्रतियोगिता का स्तर: छात्र ने राज्य, राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं में प्रथम, द्वितीय या तृतीय स्थान प्राप्त किया हो।
- मान्यता: ये अंक केवल स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SGFI) द्वारा आयोजित प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग करने पर ही देय होंगे।
- समय सीमा: प्रमाण पत्र परीक्षा वर्ष की 31 जनवरी तक प्राप्त होना अनिवार्य है।
- अंकों का वितरण: अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विजेता होने पर सर्वाधिक 20 अंक दिए जाएंगे, जबकि अन्य श्रेणियों में 5 से 15 अंकों के बीच का प्रावधान है।
ग्रेस मार्क के रूप में भी होगा इस्तेमाल
बोर्ड ने खिलाड़ियों के हित में एक बड़ा फैसला यह भी लिया है कि यदि कोई छात्र किसी विषय में अनुत्तीर्ण (Fail) हो जाता है, तो इन बोनस अंकों का उपयोग किन्हीं दो विषयों में ग्रेस मार्क (कृपांक) के रूप में किया जा सकेगा। इससे खेल के कारण पढ़ाई में पिछड़ने वाले प्रतिभावान खिलाड़ियों का साल खराब होने से बच सकेगा।
मार्कशीट में कैसे जुड़ेंगे अंक?
बोर्ड सचिव भगवती सिंह के अनुसार, दोनों स्तरों के लिए व्यवस्था इस प्रकार होगी:
- हाईस्कूल: बोनस अंकों को स्पष्ट रूप से छात्र के अंकपत्र और प्रमाणपत्र में दिखाया जाएगा।
- इंटरमीडिएट: चूंकि इंटर में फिलहाल ग्रेडिंग सिस्टम लागू नहीं है, इसलिए इन बोनस अंकों को छात्र के कुल प्राप्तांक (Grand Total) में जोड़ दिया जाएगा।
यूपी बोर्ड के इस कदम से खेल के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा। शासन से अंतिम मंजूरी मिलते ही इस व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू कर दिया जाएगा।


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